
Sanjay Khosla, an executive coach, posted on LinkedIn about his boss at Unilever London who booked him a business-class ticket to Delhi after his father died suddenly. Khosla said all flights were…
एक्जीक्यूटिव कोच संजय खोसला ने लिंक्डइन पर बताया कि कैसे उनके पिता के अचानक निधन के बाद लंदन स्थित उनके यूनिलीवर बॉस ने उन्हें दिल्ली का बिजनेस क्लास टिकट बुक कराकर दिया। खोसला ने बताया कि सभी उड़ानें बुक थीं और उनके बॉस ने महज 30 मिनट में सब कुछ व्यवस्थित कर दिया। यह कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है और लोग इस कदम की जमकर तारीफ कर रहे हैं।
खोसला ने इस टिकट को ‘गले लगाने’ जैसा बताया और कहा कि कर्मचारियों की निष्ठा बनाए रखने के लिए उन्हें ‘प्यार और पैसे’ दोनों की जरूरत होती है। उन्होंने जोर दिया कि उचित वेतन महत्वपूर्ण है लेकिन निजी संकट के समय नियोक्ता का परवाह करना भी उतना ही जरूरी है। लाइवमिंट की रिपोर्ट के अनुसार यह पोस्ट विभिन्न उद्योगों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
यह कहानी दिल को छू लेने वाली है लेकिन इसके कॉरपोरेट जगत की एक ऐसी सकारात्मक छवि बनाने का खतरा भी है जो कम वेतन या खराब कार्य संस्कृति जैसी व्यवस्थित समस्याओं को छिपा सकती है। असली परीक्षा यह है कि क्या ऐसी सहानुभूति संस्थागत है या सिर्फ एक मैनेजर का व्यक्तिगत दयाभाव। आखिर कितने कर्मचारी संकट के समय अपने बॉस के ‘गले लगाने’ का इंतजार कर सकते हैं?
स्रोत: livemint.com
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