
भारतीय रिजर्व बैंक की डॉलर बिक्री और विदेशी मुद्रा प्रवाह के कारण रुपये में उतार-चढ़ाव छह महीने के निचले स्तर पर आ गया है। बिजनेस टुडे ने ब्लूमबर्ग के हवाले से बताया…
भारतीय रिजर्व बैंक की डॉलर बिक्री और विदेशी मुद्रा प्रवाह के कारण रुपये में उतार-चढ़ाव छह महीने के निचले स्तर पर आ गया है। बिजनेस टुडे ने ब्लूमबर्ग के हवाले से बताया कि पिछले एक सप्ताह से RBI बाजार में डॉलर बेचकर रुपये को सीमित दायरे में रख रहा है। एक महीने की रियलाइज्ड वोलैटिलिटी जून के 6.1% से घटकर 3.5% हो गई, जबकि इम्प्लाइड वोलैटिलिटी 7.2% से घटकर 4.3% रही। बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 95.4075 पर था।

महंगे कच्चे तेल से रुपये और महंगाई पर दबाव बना हुआ है। ब्रेंट की कीमत लगातार छठे दिन बढ़ी और 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड एक बेसिस पॉइंट बढ़कर 6.79% हो गई। RBI की जून में शुरू विदेशी डॉलर जमा योजना से करीब 40 अरब डॉलर आने की बात रिपोर्ट में कही गई है। सभी पूंजी जुटाने वाली योजनाओं से 100 अरब डॉलर तक आने का अनुमान है।
रुपये की शांति को कुछ लोग स्थायी मजबूती और कुछ लोग RBI की कृत्रिम रोक बता रहे हैं। दोनों दावे जल्दबाजी के हैं। कम उतार-चढ़ाव आयातकों और बाजार को राहत देता है, पर महंगा तेल और पिछले एक साल में रुपये की करीब 8% कमजोरी असली दबाव दिखाते हैं। असली परीक्षा तब होगी जब तेल महंगा रहे और विदेशी पूंजी का प्रवाह घटे। तब रुपये की चाल और RBI के भंडार से तस्वीर साफ होगी।
Sources (2): bazaar.businesstoday.in, bazaar.businesstoday.in (2)
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Updated: this story now draws on 2 sources.