
नई टैक्स व्यवस्था में 60 वर्ष से कम आयु के लोगों के लिए बेसिक एग्जेम्पशन लिमिट 4 लाख रुपये है, जबकि पुरानी व्यवस्था में यह 2.5 लाख रुपये है। यदि किसी गृहिणी…
नई टैक्स व्यवस्था में 60 वर्ष से कम आयु के लोगों के लिए बेसिक एग्जेम्पशन लिमिट 4 लाख रुपये है, जबकि पुरानी व्यवस्था में यह 2.5 लाख रुपये है। यदि किसी गृहिणी की सालाना आय इस सीमा से अधिक होती है, तो उसे ITR भरना पड़ सकता है। आय के स्रोतों में बैंक ब्याज, फिक्स्ड डिपॉजिट से ब्याज, किराया और निवेश पर रिटर्न शामिल हैं।
पति द्वारा घरेलू खर्च के लिए दिया गया धन आय नहीं माना जाता। गैर-रिश्तेदारों से 50,000 रुपये से अधिक का गिफ्ट टैक्सेबल हो सकता है। गृहिणी PPF, NSC, हेल्थ इंश्योरेंस जैसी कटौतियों का लाभ ले सकती हैं। कुल आय की गणना करके ही तय होगा कि ITR जरूरी है या नहीं।
यह आम धारणा कि बिना नौकरी वाली गृहिणियों को ITR की चिंता नहीं करनी चाहिए, गलत हो सकती है। बैंक ब्याज, FD और किराये की आय को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। दूसरी ओर, पति से मिले खर्च के पैसे को आय मानने की गलती भी न करें। असली परीक्षा तब होगी जब वह अपनी FD ब्याज, किराया और निवेश आय को जोड़कर देखें कि क्या वह 4 लाख रुपये की सीमा पार करती है।
Source: bazaar.businesstoday.in
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