
केंद्र सरकार ने UPS में फिलहाल किसी बदलाव से इनकार किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बताया कि NPS के दायरे वाले केंद्रीय कर्मचारी अपनी इच्छा से UPS चुन…
केंद्र सरकार ने UPS में फिलहाल किसी बदलाव से इनकार किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बताया कि NPS के दायरे वाले केंद्रीय कर्मचारी अपनी इच्छा से UPS चुन सकते हैं। UPS 1 अप्रैल 2025 से NPS के भीतर वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में लागू है। यह नई नियुक्तियों, मौजूदा NPS कर्मचारियों और पात्र सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए उपलब्ध है। योजना में महंगाई भत्ते से जुड़ी पेंशन और मृत्यु के बाद पति या पत्नी को 60 प्रतिशत फैमिली पेंशन का प्रावधान है।
Business Today के अनुसार, युवा कर्मचारी NPS को इसलिए पसंद कर रहे हैं क्योंकि 60 वर्ष से पहले नौकरी छोड़ने पर UPS की सुनिश्चित पेंशन नहीं मिल सकती। NPS में कर्मचारी फंड मैनेजर और निवेश विकल्प चुनते हैं तथा PRAN में जमा राशि पर उनका स्वामित्व रहता है, लेकिन अंतिम फंड बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। कर्मचारी संगठनों ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग की है।
UPS को पूरी तरह सुरक्षित और NPS को पूरी तरह जोखिमभरा बताने वाली दोनों तरह की बातें अधूरी हैं। UPS में कर्मचारी का 10 प्रतिशत योगदान बना रहता है, जबकि NPS बाजार पर निर्भर है और नौकरी जल्दी छोड़ने वालों के लिए उसके लाभ अलग हो सकते हैं। असली फैसला प्रचार से नहीं, सेवा अवधि, योगदान और निकासी नियमों की साफ तुलना से होगा। सरकार को हर कर्मचारी के लिए यह गणना सार्वजनिक करनी चाहिए कि 60 वर्ष की उम्र तक दोनों विकल्पों में अनुमानित लाभ कितना बनेगा।
Source: bazaar.businesstoday.in
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