
The Allahabad High Court has raised concern after police verification found adverse reports against 527 of 2,370 school vehicle drivers in Uttar Pradesh under Mission Bharosa. The bench of Justices Alok Mathur…
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मिशन भरोसा के तहत उत्तर प्रदेश में 2,370 स्कूल वाहन चालकों के पुलिस सत्यापन में 527 ड्राइवरों की प्रतिकूल रिपोर्ट पाए जाने पर चिंता जताई है। जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस बृज राज सिंह की खंडपीठ स्कूल सुरक्षा से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अदालत को स्कूल बस और वैन ड्राइवरों द्वारा बच्चों के यौन उत्पीड़न के कथित मामलों के बारे में भी जानकारी दी गई।
अदालत ने राज्य सरकार से उन प्रावधानों पर विचार करने को कहा है जिनके तहत स्कूलों और निजी परिवहन एजेंसियों के लिए ड्राइवरों के प्रमाण-पत्रों का सत्यापन अनिवार्य हो। कोर्ट ने स्कूलों के बाहर हाई-टेंशन बिजली लाइनों, असुरक्षित इमारतों और यातायात से जुड़े जोखिमों पर भी चर्चा की। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को इस मामले में प्रतिवादी के रूप में जोड़ा गया है। मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त 2026 को होगी।
यह कहना आसान है कि केवल महिला ड्राइवर ही स्कूल परिवहन के जोखिमों को हल कर सकती हैं या यह कि पुलिस रिपोर्ट अपने आप में अपराध का प्रमाण है। हकीकत में दोनों ही बातें पर्याप्त नहीं हैं। स्कूलों को दस्तावेजी जांच, स्पष्ट अनुबंध, निगरानी, काम करने वाले सीसीटीवी कैमरे और प्रतिकूल रिपोर्ट पर त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है। अदालत की चिंता जायज है लेकिन सुझावों से ज्यादा प्रभावी क्रियान्वयन मायने रखता है। असली परीक्षा यह है कि क्या बच्चों को ले जाने से पहले हर ड्राइवर और परिवहन एजेंसी का सत्यापन किया जा रहा है और चिह्नित 527 ड्राइवरों के मामले में प्रशासन कितनी तेजी से कदम उठाता है।
स्रोत: livelaw.in
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