
Goa police have roped in courier companies and postal operators to help detect narcotics being smuggled through delivery networks. The initiative is part of a three-year action plan under the Centre's 'Nasha…
गोवा पुलिस ने डिलीवरी नेटवर्क के जरिए तस्करी की जा रही नशीली दवाओं का पता लगाने में मदद के लिए कूरियर कंपनियों और डाक ऑपरेटरों को शामिल किया है। यह पहल केंद्र के ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के तहत तीन साल की कार्य योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य संगठित ड्रग सप्लाई चेन को खत्म करना और राज्य को पारगमन केंद्र के रूप में इस्तेमाल होने से रोकना है, जैसा कि टाइम्सनाउ डॉट कॉम की रिपोर्ट में बताया गया है।

पुलिस ने हाल ही में पणजी में कूरियर और डाक एजेंसियों के 80 से अधिक प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक की। एक अधिकारी ने बताया कि इसका उद्देश्य ऑपरेटरों को संदिग्ध खेपों की पहचान के लिए संवेदनशील बनाना था, जिनमें छद्म नामों से बुकिंग, अधूरे भेजने वाले या प्राप्तकर्ता के विवरण, असामान्य पैकेजिंग या असंगत घोषणाएं शामिल हों। एंटी-नार्कोटिक्स सेल ने कूरियर सेवाओं के जरिए भेजी गई किताबों, फोटो फ्रेम और अन्य रोजमर्रा की वस्तुओं के अंदर एलएसडी और अन्य सिंथेटिक ड्रग्स छिपे पाए हैं।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि यह कदम अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क द्वारा कूरियर और डाक चैनलों के व्यवस्थित उपयोग को निशाना बनाता है। नार्कोटिक्स से जुड़े मनी लॉन्डरिंग की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय ने पाया कि सिंडीकेट कूरियर सेवाओं के साथ डिजिटल भुगतान और क्रप्टोकरेंसी का भी इसतेमाल कर रहे थे। इस योजन में लॉजिस्टक्स ऑपरेटरों के साथ नियमित जागरूकता सेशन और जानकारी साझा करना शामिल है। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने 5.26 करोड़ रुपये में खरीदी गई 46 नई पेट्रोलिंग जीपों को भी हरी झंडी दिखाई।
स्रोत: टाइम्सनाउ डॉट कॉम
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