
The Indian Stroke Association (ISA) has called for greater public awareness of early stroke symptoms and expanded doctor training in tier-2 and tier-3 cities. India records over 18 lakh stroke cases every…
इंडियन स्ट्रोक एसोसिएशन (ISA) ने स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों के प्रति जन जागरूकता बढ़ाने और टियर-2 तथा टियर-3 शहरों में डॉक्टरों के प्रशिक्षण का विस्तार करने की मांग की है। खोपोली में आयोजित तीन दिवसीय 12वें स्ट्रोक समर स्कूल 2026 के दौरान ISA ने बताया कि भारत में हर साल 18 लाख से अधिक स्ट्रोक के मामले दर्ज किए जाते हैं। लगभग हर 7 में से 1 स्ट्रोक का मरीज 45 वर्ष से कम उम्र का होता है और करीब 5 में से 2 मरीज लक्षण शुरू होने के 24 घंटे बाद अस्पताल पहुंच पाते हैं।
ISA अब तक करीब 10,000 डॉक्टरों को स्ट्रोक प्रबंधन का प्रशिक्षण दे चुका है। विशेषज्ञों ने बड़े शहरों से परे स्ट्रोक के लिए तैयार सुविधाएं विकसित करने और हर जिले में न्यूरो-रिहैबिलिटेशन केंद्र खोलने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने लोगों से BE FAST (बी फास्ट) मंत्र याद रखने का आग्रह किया है जिसमें संतुलन खोना, दृष्टि में बदलाव, चेहरे का लटकना, हाथ में कमजोरी, बोलने में कठिनाई और आपातकालीन सेवाओं को कॉल करने का समय शामिल है।
स्वास्थ्य चेतावनियों की सुस्त मीडिया कवरेज अक्सर केवल अपील दोहराने से ज्यादा कुछ नहीं करती। असली परीक्षा यह है कि क्या जिला अस्पतालों और छोटे शहरों के क्लीनिकों को चार घंटे की गोल्डन विंडो के भीतर काम करने के लिए उपकरण और कर्मचारी मिलेंगे। ISA का कहना है कि वे प्रति कार्यक्रम 100 चिकित्सकों को प्रशिक्षित करते हैं जो गौर करने लायक संख्या है। यदि प्रशिक्षण का परिणाम प्रति वर्ष 18 लाख मामलों के बोझ के अनुरूप नहीं है तो हर चेतावनी सिर्फ शोर के समान है।
स्रोत: freepressjournal.in
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