
Several states, including Uttar Pradesh, Andhra Pradesh and Bihar, are offering one-time capital subsidies to help households install rooftop solar panels under the central government's ₹75,000 crore PM Surya Ghar scheme. The…
उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और बिहार समेत कई राज्य केंद्र सरकार की 75,000 करोड़ रुपये की पीएम सूर्य घर योजना के तहत घरों में रूफटॉप सोलर पैनल लगवाने के लिए एकमुश्त पूंजीगत सब्सिडी दे रहे हैं। इस कदम का उद्देश्य परिवारों को सब्सिडी वाली या मुफ्त बिजली देने से राज्यों को होने वाले निरंतर राजस्व नुकसान को कम करना है।
यह योजना मार्च 2027 तक एक करोड़ घरों में सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य रखती है। 13 अगस्त तक 52 लाख परिवारों ने रूफटॉप सोलर लगवा लिया है। CEEW के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि जो 73% परिवार रूफटॉप सोलर को महंगा मानते हैं, उन्हें उपलब्ध वित्तपोषण विकल्पों के बारे में जानकारी नहीं है। इस मांग को पूरा करने से 22.7 गीगावाट क्षमता जुड़ सकती है।
मुफ्त बिजली की जगह रूफटॉप सोलर के लिए एकमुश्त सब्सिडी देना वित्तीय दृष्टि से समझदारी भरा है लेकिन इसे सबके लिए फायदेमंद बताने के पीछे की सच्चाई कुछ और है। जिन परिवारों को पहले से मुफ्त बिजली मिल रही है, उनके पास सोलर लगवाने का कोई कारण नहीं है जब तक कि राज्य इसकी पूरी लागत न उठा ले। CEEW सर्वेक्षण दिखाता है कि 73% परिवार जो सोलर को महंगा समझते हैं उन्हें लोन के विकल्पों की जानकारी ही नहीं है। यह वितरण की विफलता है न कि उपभोक्ताओं की पसंद। असली परीक्षा यह होगी कि बिहार और यूपी जैसे कमजोर वित्तीय स्थिति वाले राज्य यूटिलिटी आधारित एग्रीगेशन मॉडल को लागू कर पाएंगे या नहीं और कहीं इसका बोझ अंततः बढ़े हुए टैरिफ के जरिए उपभोक्ताओं पर तो नहीं पड़ेगा।
स्रोत: thehindu.com
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