
Bangladesh saw renewed clashes between student groups during the second anniversary of the uprising that forced Sheikh Hasina to leave office. The BNP student wing, Jatiotabadi Chatra Dal, and opposition Bangladesh Islami…
शेख हसीना को पद छोड़ने के लिए मजबूर करने वाले आंदोलन की दूसरी बरसी के दौरान बांग्लादेश में छात्र समूहों के बीच फिर से संघर्ष देखा गया। बीएनपी की छात्र शाखा जातीयतावादी छात्र दल और विपक्षी बांग्लादेश इस्लामी छात्र शिबिर के कार्यकर्ता कई परिसरों में हुई हिंसा में शामिल थे। 4 अगस्त को जगन्नाथ विश्वविद्यालय और ढाका कॉलेज समेत अन्य संस्थानों में 100 से अधिक लोग घायल हुए। अगले दिन बारीसाल विश्वविद्यालय और सरकारी तोलाराम कॉलेज समेत अन्य स्थानों पर कम से कम 30 कार्यकर्ता घायल हुए।
प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी सरकार ने अपने चुनाव अभियान के दौरान राज्य समर्थित हिंसा को खत्म करने का वादा किया था। अधिकार समूहों और विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और कमजोर कानून व्यवस्था को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। ह्यूमन राइट्स सपोर्ट सोसाइटी ने जुलाई में मौतों और घायलों की संख्या तथा हजारों गिरफ्तारियों की भी सूचना दी है। हालांकि व्यक्तिगत घटनाओं के लिए जिम्मेदारी का विषय अभी भी विवादित है।
ये झड़पें दर्शाती हैं कि सत्ता परिवर्तन के बाद जन आंदोलन के दौरान बने गठबंधन कैसे बिखर सकते हैं। एक और क्रांति या तानाशाही की वापसी के दावे तनाव को बढ़ा सकते हैं लेकिन इस रिपोर्ट से ऐसा कोई परिणाम सिद्ध नहीं होता है। निष्पक्ष जांच और पारदर्शी पुलिस कार्रवाई की आवश्यकता है। छात्रों और राजनीतिक समूहों को हिंसा से बचना चाहिए जबकि अधिकारियों को बिना किसी पक्षपात के आरोपों का समाधान करना चाहिए।
स्रोत: www.thehindu.com
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