
Delhi's Master Plan for 2047, approved by the Delhi Development Authority (DDA) on Wednesday, proposes linking nine heritage clusters into 'cultural precincts' to improve conservation, mobility and visitor amenities. The indicative list…
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) द्वारा बुधवार को मंजूर दिल्ली मास्टर प्लान 2047 में संरक्षण और पर्यटकों की सुविधा बढ़ाने के लिए नौ धरोहर क्लस्टरों को ‘सांस्कृतिक क्षेत्रों’ (cultural precincts) के रूप में जोड़ने का प्रस्ताव है। इस सूची में निजामुद्दीन दरगाह-हुमायूं का मकबरा-सुंदर नर्सरी कॉम्प्लेक्स, पुरानी दिल्ली और महरौली, हौज खास व लोधी रोड जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
हर क्षेत्र के लिए एक सांस्कृतिक संसाधन प्रबंधन योजना तैयार की जाएगी जो शहरी डिजाइन नियंत्रण, जीर्णोद्धार के दिशा-निर्देश और यातायात रणनीतियां तय करेगी। पुरानी दिल्ली के लिए विशेष नियम होंगे जैसे ग्रुप हाउसिंग पर रोक, अनिवार्य स्टिल्ट पार्किंग का नियम लागू नहीं होगा और पैदल चलने व साइकिल चलाने की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। सेंट्रल विस्टा को लुटियंस बंगला जोन के भीतर एक अलग सांस्कृतिक क्षेत्र के रूप में पहचाना गया है। इसमें पांच पुरातात्विक पार्कों का भी उल्लेख है।
सांस्कृतिक क्षेत्रों के लिए एमपीडी-2047 योजना सुनने में तो अच्छी लगती है लेकिन धरोहरों को लेकर दिल्ली का पिछला रिकॉर्ड बहुत उत्साहजनक नहीं रहा है। यह धारणा कि सिर्फ एक मास्टर प्लान अतिक्रमण और उपेक्षा जैसी समस्याओं को हल कर देगा पुरानी हो चुकी है। जब तक DDA कम से कम एक क्षेत्र के लिए भी सांस्कृतिक संसाधन प्रबंधन योजनाओं को लागू नहीं करता और उसके लिए फंड जारी नहीं करता तब तक यह केवल एक इच्छा सूची ही बनी रहेगी। क्या पुरानी दिल्ली को स्टिल्ट पार्किंग से मिली छूट पहले ट्रैफिक जाम के बाद भी बरकरार रह पाएगी?
स्रोत: hindustantimes.com
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