
Prime Minister Narendra Modi on Saturday said armed Naxalism was “breathing its last” and warned against people he called “dimaagi Naxals”. Speaking from the Red Fort on Independence Day, Modi alleged that…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि सशस्त्र नक्सलवाद ‘अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है’, लेकिन उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने वाले लोगों के खिलाफ आगाह किया। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से बोलते हुए मोदी ने आरोप लगाया कि माओवादी सोच रखने वाले लोग सार्वजनिक जीवन में बने हुए हैं और हिंसा तथा अशांति फैलाने के अवसर तलाश रहे हैं। उन्होंने ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने का आह्वान किया और साथ ही युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया।

मोदी ने कहा कि नक्सल हिंसा ने चार दशकों तक भारत के बड़े हिस्से को बंदूकों की जकड़ में रखा। उन्होंने दावा किया कि नागरिकों की रक्षा में 3,500 से अधिक सुरक्षाकर्मी शहीद हुए और कहा कि कभी विद्रोह से प्रभावित इलाकों में अब विकास हो रहा है। ये टिप्पणियाँ उनके व्यापक स्वतंत्रता दिवस संबोधन का हिस्सा थीं।

‘दिमागी नक्सल’ जैसी उपाधि असहमति, आलोचना और अवैध हिंसा को एक धुंधली श्रेणी में बदलने का जोखिम उठाती है। प्रधानमंत्री के सशस्त्र विद्रोह और सुरक्षाकर्मियों के बलिदान के बयानों की जांच जरूरी है, लेकिन बिना किसी आचरण या सबूत के विरोधियों को ब्रांड करने का प्रयास भी उतना ही परखा जाना चाहिए। असली कसौटी सरल है: अभियोजन राजनीतिक लेबल पर नहीं, बल्कि विशिष्ट अपराधों और सबूतों पर आधारित होने चाहिए। कितने मामले वास्तव में दायर होंगे और अदालत में टिकेंगे?
स्रोत (3): ndtv.com, greaterkashmir.com, timesofindia.indiatimes.com
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