
Prime Minister Narendra Modi, in his 80th Independence Day address from the Red Fort, warned against 'Dimagi Naxals' (intellectual Naxals) who he said are entrenched in the system and pose an ideological…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से अपने संबोधन में कहा कि जहां सशस्त्र नक्सलवाद अपने अंत के करीब है वहीं ‘दिमागी नक्सली’ मानसिकता वाले कुछ लोग देश में अशांति पैदा करना चाहते हैं। इस टिप्पणी की कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने कड़ी आलोचना की है। उन्होंने प्रधानमंत्री पर आरोप लगाया कि वे सरकार से सवाल पूछने वाले शिक्षित युवाओं को बिना सोचे-समझे ‘नक्सली’ का दर्जा दे रहे हैं।
डेक्कन हेराल्ड के अनुसार ‘नक्सल’ शब्द की उत्पत्ति 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी में हुए सशस्त्र किसान विद्रोह से हुई थी जो बाद में एक राजनीतिक लेबल बन गया। दास ने कहा कि जिस पीढ़ी को चुप रहने के लिए कहा गया था उसने अब अपनी आवाज पा ली है और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन तेजी से फैल रहे हैं।
‘दिमागी नक्सली’ लेबल उन बयानबाजी की लंबी श्रृंखला में नवीनतम है जो हिंसक उग्रवाद और वैध असहमति के बीच के अंतर को धुंधला करती है। हालांकि सशस्त्र नक्सलवाद वास्तव में एक सुरक्षा चुनौती है लेकिन सभी आलोचकों पर हिंसक मंशा रखने का आरोप लगाना युवाओं के प्रति अन्याय है। असली परीक्षा लेबल की नहीं बल्कि नौकरियों न्याय और अभिव्यक्ति की आजादी पर सरकार के रिकॉर्ड की है। ये आंकड़े ही तय करेंगे कि यह आरोप सही है या गलत।
स्रोत (2): deccanherald.com, timesnownews.com
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