
Prime Minister Narendra Modi on Saturday used his 80th Independence Day address to speak of 'dimagi Naxals' (people with a Naxal mentality), drawing sharp criticism from opposition parties. Congress leader Jairam Ramesh…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अपने 80वें स्वतंत्रता दिवस के संबोधन के दौरान ‘दिमागी नक्सलियों’ का जिक्र किया, जिसके बाद विपक्षी दलों ने उनकी कड़ी आलोचना की है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मोदी को ‘अपशब्दों का उस्ताद’ करार दिया, जबकि सीपीआई (एम) के महासचिव एम. ए. बेबी ने माओवादियों के प्रबंधन में सरकार पर ‘राज्य प्रायोजित आतंकवाद’ का आरोप लगाया और कहा कि यह लेबल असहमति को कलंकित करने वाला है। मोदी ने दावा किया कि सशस्त्र नक्सलवाद समाप्त हो रहा है और उन्होंने उल्लेख किया कि 3,500 से अधिक सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसी सोच संस्थाओं में अभी भी मौजूद है।


विपक्ष का यह आरोप कि ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल असहमति की आवाज को दबाने के लिए किया गया है, आलोचकों के खिलाफ पहले लगाए गए ‘शहरी नक्सल’ के आरोपों की याद दिलाता है। हालांकि सरकार का डेटा सशस्त्र माओवादी हिंसा में वास्तविक गिरावट दिखाता है। सवाल यह है कि क्या वैचारिक विरोधियों को हिंसक चरमपंथी करार देना असंतोष को अलग-थलग करता है या वैध आलोचकों को दूर करता है। आने वाले महीनों में गिरफ्तारियों और आत्मसमर्पण की संख्या इसका स्पष्ट प्रमाण देगी।
स्रोत (3): thehindu.com, thenewsminute.com, hindustantimes.com
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