
President Droupadi Murmu, in her address to the nation on the eve of India's 80th Independence Day, said the government is taking comprehensive steps to reform public examinations to completely curb paper…
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं में सुधार और पेपर लीक जैसी धांधली को पूरी तरह से रोकने के लिए व्यापक कदम उठा रही है। उन्होंने छात्रों को भारत के भविष्य का निर्माता बताया और जोर दिया कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाया जाना चाहिए। यह देखते हुए कि भारत की 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है, उन्होंने कहा कि युवा राष्ट्र की सबसे मूल्यवान संपत्ति हैं।
मुर्मू ने एक साल पहले शुरू किए गए आतंकवाद विरोधी अभियान ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया और कहा कि इसने आतंकवादियों और उनके समर्थकों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि के निलंबन को राष्ट्र और विशेष रूप से किसानों के लिए एक निर्णायक कदम बताया। आंतरिक सुरक्षा पर उन्होंने नक्सलवाद के खात्मे को एक बड़ी उपलब्धि करार दिया। उन्होंने खेलो इंडिया कार्यक्रम और सारनाथ को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में सूचीबद्ध किए जाने का भी उल्लेख किया।
परीक्षाओं में पेपर लीक को पूरी तरह से खत्म करने का सरकार का वादा सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन यूपीएससी, नीट और राज्य स्तरीय परीक्षाओं के पुराने घोटालों ने भरोसे को कम किया है। पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट की परख सिर्फ भाषणों से नहीं बल्कि दोषियों को सजा दिलाने से होगी। वहीं, ऑपरेशन सिंदूर और सिंधु जल संधि का उल्लेख राष्ट्रवादी भावनाओं को भुनाने जैसा है, लेकिन आम भारतीय यह जानना चाहते हैं कि क्या जल बंटवारे पर वास्तव में फिर से बातचीत होगी या यह चुनाव से पहले महज एक चेतावनी है।
स्रोत (2): telanganatoday.com, timesofindia.indiatimes.com
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