
A new study in the journal Science finds that invasive alien species cause more severe environmental impacts in the Global South, including India, than in wealthy countries. Researchers used the IUCN's EICAT…
साइंस पत्रिका में प्रकाशित एक नया अध्ययन बताता है कि भारत जैसे ग्लोबल साउथ के देशों में आक्रामक विदेशी प्रजातियों का पर्यावरणीय प्रभाव अमीर देशों के मुकाबले काफी गंभीर है। शोधकर्ताओं ने औसत प्रभाव की गंभीरता को मापने के लिए IUCN की EICAT प्रणाली का उपयोग किया और शोध संबंधी उस पूर्वाग्रह को सुधारा जिसके कारण ग्लोबल नॉर्थ के देशों की स्थिति पहले खराब दिखाई देती थी। यह अध्ययन 172 देशों की 3,300 से अधिक आक्रामक प्रजातियों के दो वैश्विक डेटासेट को जोड़ता है।
अध्ययन के अनुसार भारत में आक्रामक प्रजातियों के प्रभाव की औसत गंभीरता ग्लोबल नॉर्थ की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में स्पष्ट रूप से अधिक है। कमजोर शासन और सीमित प्रबंधन क्षमता को ग्लोबल साउथ में उच्च प्रभाव गंभीरता का प्रमुख कारण माना गया है। ये निष्कर्ष उस आम धारणा को चुनौती देते हैं कि जैविक आक्रमणों का सबसे अधिक बोझ अमीर देश ही झेलते हैं।
यह अध्ययन आक्रामक प्रजातियों से निपटने के मामले में आर्थिक विकास के बजाय शासन की गुणवत्ता को जिम्मेदार ठहराता है। भारतीय पाठकों को इस आलसी नैरेटिव को खारिज कर देना चाहिए कि विकास स्वतः ही आक्रमणों को बदतर बना देता है। असली कारक धन नहीं बल्कि प्रबंधन क्षमता है। अब परीक्षा इस बात की है कि क्या भारत का पर्यावरण मंत्रालय अगले एक साल के भीतर आक्रामक प्रजातियों पर अपनी राष्ट्रीय कार्य योजना को अपडेट करेगा या फिर कमजोर शासन को उच्च प्रभाव गंभीरता का कारण बनने देगा।
स्रोत: india.mongabay.com
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