
In two months, Hindi cinema has seen the release of two big films set during the Partition of India: Main Vaapas Aaunga and Batwara 1947. Both focus on the human cost of…
दो महीनों के भीतर हिंदी सिनेमा में भारत विभाजन की पृष्ठभूमि पर बनी दो बड़ी फिल्में रिलीज हुई हैं: मैं वापस आऊंगा और बंटवारा 1947। दोनों फिल्में राजनीतिक उथल-पुथल के बजाय विभाजन की मानवीय कीमत पर ध्यान केंद्रित करती हैं और प्रेम व उम्मीद को उजागर करती हैं। इम्तियाज अली की फिल्म मैं वापस आऊंगा विभाजन के कारण अलग हुए एक सिख युवक और एक युवती की प्रेम कहानी है, जबकि राजकुमार संतोषी की बंटवारा 1947 में सनी देओल एक मुस्लिम व्यक्ति की भूमिका में हैं जो एक हिंदू महिला को शरण देता है। निर्देशकों का कहना है कि ये फिल्में विभाजन के दौरान दिखाई गई हिम्मत और बर्बरता दोनों को स्वीकार करती हैं।


बॉलीवुड पर अक्सर यह आरोप लगता है कि वह राष्ट्रवाद को भुनाने के लिए विभाजन का इस्तेमाल करता है या फिर इससे पूरी तरह बचता है। हालांकि ये दोनों फिल्में एक बीच का रास्ता अपनाती हैं क्योंकि ये न तो हिंसा का महिमामंडन करती हैं और न ही इसे नजरअंदाज करती हैं। व्यक्तिगत प्रेम और नुकसान को केंद्र में रखकर ये हमें याद दिलाती हैं कि आम लोगों ने विभाजन को एक राजनीतिक घटना के रूप में नहीं बल्कि एक मानवीय त्रासदी के रूप में अनुभव किया था। अब असल परीक्षा यह है कि क्या इस तरह की कहानी बॉक्स ऑफिस पर शोर मचाने वाली और अधिक ध्रुवीकरण करने वाली फिल्मों के सामने टिक पाएगी।
स्रोत: hindustantimes.com
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