
Assam Chief Minister Himanta Biswa Sarma on Saturday urged people from other Indian states who have settled in Assam to list 'Assamese' as their mother tongue during the ongoing Census. He made…
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को अन्य भारतीय राज्यों से आकर असम में बसे लोगों से जारी जनगणना के दौरान अपनी मातृभाषा के रूप में ‘असमिया’ दर्ज करने की अपील की। उन्होंने यह अपील 1971 में 59.5% से घटकर 2011 में 48.4% पर आए असमिया भाषियों की संख्या में लगातार गिरावट के मद्देनजर की है। सरमा ने कहा कि बराक घाटी के बंगाली भाषी निवासी और जनजातीय समुदाय अपनी पसंद के अनुसार अपनी भाषा दर्ज कराने के लिए स्वतंत्र हैं। स्व-गणना का कार्य 2 अगस्त से 16 अगस्त तक चलेगा और मकानों की सूची बनाने का काम 17 अगस्त से 15 सितंबर तक होगा। बाढ़ प्रभावित शिवसागर और चराइदेव जिलों में यह प्रक्रिया फिलहाल टाल दी गई है।
इस अपील को कुछ लोग सांस्कृतिक दावे के रूप में तो कुछ लोग जनसांख्यिकीय चिंता के तौर पर देख रहे हैं। वास्तविकता यह है कि सरमा ने जनजातीय लोगों और बराक घाटी को स्पष्ट रूप से इस आग्रह से बाहर रखा है और उनकी विशिष्ट भाषाओं को स्वीकार किया है। 1971 में 59.5% से घटकर 2011 में 48.4% हुए असमिया भाषियों की संख्या में गिरावट निर्विवाद है लेकिन जनगणना में स्व-घोषणा स्वैच्छिक है। असली परीक्षा 2026 की जनगणना के आंकड़े होंगे। क्या यह अपील प्रवासियों को प्रभावित करेगी या वे अपनी पैतृक भाषाएं ही दर्ज कराते रहेंगे?
स्रोत: indiatoday.in
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