
Automobile OEMs are bracing for sustained input-cost pressure in the ongoing quarter, even after a strong Q1 performance. According to the Economic Times, most automakers remain reluctant to pass on the full…
पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन के बावजूद वाहन निर्माता कंपनियां दूसरी तिमाही में कच्चे माल की बढ़ती लागत के दबाव का सामना कर रही हैं। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार अधिकतर वाहन निर्माता कंपनियां लागत बढ़ने का पूरा बोझ ग्राहकों पर डालने से बच रही हैं। इस कारण दूसरी तिमाही में कमोडिटी की कीमतें सबसे महत्वपूर्ण बिंदु बनी हुई हैं।
उद्योग जगत कच्चे माल की कीमतों पर बारीकी से नजर रख रहा है क्योंकि इनके उच्च स्तर पर बने रहने से लाभप्रदता प्रभावित हो सकती है। कीमतों में बढ़ोतरी न करने का निर्णय बाजार की मांग को लेकर चिंता को दर्शाता है। यदि कच्चे माल की लागत कम नहीं होती है तो कंपनियों के मुनाफे पर संकट आ सकता है।
यह कहना कि वाहन कंपनियां कीमतें बढ़ाने में हिचकिचा रही हैं अक्सर भविष्य में होने वाली बढ़ोतरी का संकेत माना जाता है। लेकिन वैश्विक स्तर पर कच्चे माल में उतार चढ़ाव और कमजोर मांग को देखते हुए यह हिचकिचाहट वास्तविक हो सकती है। असली परीक्षा दूसरी तिमाही के नतीजों के बाद होगी। यदि मुनाफा कम होता है तो कंपनियों की सावधानी सही साबित होगी। यदि ऐसा नहीं होता है तो उपभोक्ताओं को वाहन महंगे होने के लिए तैयार रहना चाहिए।
स्रोत: auto.economictimes.indiatimes.com
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