
Most Indian savings accounts offer annual returns of 2.5% to 4%, while inflation erodes purchasing power, according to Livemint. Leaving large sums idle means the money's real value declines over time, even…
बचत खातों में 2.5% से 4% सालाना ब्याज मिलने के बावजूद महंगाई (इन्फ्लेशन) खरीद क्षमता को खा जाती है. Livemint के अनुसार बचत खातों में बड़ी रकम पड़ी रहने पर पैसे की असली कीमत समय के साथ घटती जाती है, हालांकि नॉमिनल बैलेंस बढ़ता नजर आता है.
वित्तीय सलाहकार छह महीने के ज़रूरी खर्च के बराबर का इमरजेंसी फंड तरल रूप (लिक्विड) में रखने की सलाह देते हैं. इस एमरजेंसी कुशन से अधिक का कोई भी सरप्लस हिस्सा फिक्स्ड डिपॉजिट, रेकरिंग डिपॉजिट या म्यूचुअल फंड जैसे साधनों में निवेश करना चाहिए. यह निवेश व्यक्ति के जोखिम उठाने की क्षमता (रिस्क अपेटाइट) और समय सीमा (टाइम होराइज़न) पर निर्भर करेगा.
लेख में बताया गया है कि बचत खाते के बैलेंस की समय-समय पर समीक्षा (रिव्यू) करते रहना चाहिए. अगर बिना किसी काम का पैसा लगातार जमा होता रहे, तो इसे संपत्ति (प्रॉपर्टी), शिक्षा या रिटायरमेंट जैसे दीर्घकालिक लक्ष्यों के लिए लगा देना चाहिए, ताकि संपत्ति की चुपचाप होने वाली घिसाई (साइलेंट इरोज़न) से बचा जा सके.
Source: livemint.com
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