
On April 11, the Karnataka Cabinet accepted a decade-old caste survey from the State Commission for Backward Classes, triggering political turmoil. The survey, conducted in 2015, covered 1.35 crore households and 5.98…
11 अप्रैल को कर्नाटक कैबिनेट ने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की एक दशक पुरानी जाति सर्वेक्षण रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया जिससे राज्य में राजनीतिक हलचल मच गई है। 2015 में किए गए इस सर्वेक्षण में 1.35 करोड़ परिवार और 5.98 करोड़ लोग शामिल थे जो उस समय की अनुमानित जनसंख्या का लगभग 95 प्रतिशत है। इस रिपोर्ट के अनुसार राज्य में पिछड़े वर्गों की आबादी 70 प्रतिशत है।
मुस्लिम 12.58 प्रतिशत के साथ सबसे बड़ा समूह हैं इसके बाद वीरशैव-लिंगायत 11 प्रतिशत और वोक्कालिगा 10.29 प्रतिशत हैं। हेगड़े आयोग ने पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण को 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 51 प्रतिशत करने और जातियों को छह श्रेणियों में पुनर्वर्गीकृत करने की सिफारिश की थी। प्रभावशाली समुदायों ने इन निष्कर्षों को अवैज्ञानिक बताते हुए खारिज कर दिया है और यह दावा करते हुए नए सिरे से सर्वेक्षण की मांग की है कि उनकी आबादी कम दिखाई गई है।
कैबिनेट ने अगली चर्चा 2 मई तक के लिए टाल दी है और कर्नाटक उच्च न्यायालय ने भी इस मामले पर संज्ञान लिया है। सरकार ने अभी तक पूरा सामाजिक-आर्थिक डेटा सार्वजनिक चर्चा के लिए जारी नहीं किया है।
स्रोत: thehindu.com
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