
The Madras High Court on Friday reserved its orders on a writ petition by T. Ramesh, a fitness centre owner from Karur and co-accused in the TASMAC tender irregularities case, seeking to…
मद्रास उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को टस्मैक टेंडर अनियमितता मामले में आरोपी टी. रमेश की डीवीएसी प्राथमिकी को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। डीएमके के पूर्व मंत्री वी. सेंथिलबालाजी के सह-आरोपी रमेश का तर्क है कि उन्हें एक अन्य मामले में जमानत मिलने के तुरंत बाद गिरफ्तार किया गया था और प्राथमिकी में उनका नाम तक दर्ज नहीं है।
याचिका में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17 को भी चुनौती दी गई है जो बिना समन जारी किए गिरफ्तारी की अनुमति देती है और इसे असंवैधानिक बताया गया है। डीवीएसी ने इस याचिका का विरोध करते हुए 100 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का हवाला दिया है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने तर्क दिया कि धारा 17 को चुनौती देना विचारणीय नहीं है।
जब भी अदालत में इस तरह का मामला आता है तो यह चर्चा जोर पकड़ लेती है कि डीवीएसी राजनीतिक विरोधियों को निशाना बना रही है। लेकिन जनता को इसे टस्मैक टेंडर से हुए कथित 100 करोड़ रुपये के नुकसान के परिप्रेक्ष्य में देखना चाहिए। असली परीक्षा यह होगी कि क्या अदालत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17 की संवैधानिकता की जांच करेगी या रमेश की गिरफ्तारी में प्रक्रियात्मक अनियमितताओं पर ही ध्यान केंद्रित रखेगी। जो भी हो, यह आदेश पुलिस की शक्तियों और निष्पक्ष जांच के अधिकार पर एक मिसाल कायम करेगा।
स्रोत: thehindu.com
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