
A National Centre for Sustainable Coastal Management assessment found no measurable ecological or socioeconomic damage in Lakshadweep from the sinking of MSC Elsa 3 off Kerala on May 25, 2025. The vessel…
राष्ट्रीय सतत तटीय प्रबंधन केंद्र के आकलन में 25 मई 2025 को केरल तट पर एमएससी एल्सा 3 के डूबने से लक्षद्वीप में कोई मापनीय पारिस्थितिक या सामाजिक-आर्थिक क्षति नहीं पाई गई। जहाज में 640 कंटेनर थे, जिनमें 13 खतरनाक कार्गो और 12 कैल्शियम कार्बाइड के थे। कल्पेनी और अंदरोट में क्षेत्र सर्वेक्षण, प्रयोगशाला परीक्षण, रिमोट सेंसिंग और तेल रिसाव मॉडलिंग से समुद्री जल, तलछट, प्रवाल भित्तियाँ, समुद्री घास, प्लवक और लैगून आवास प्राकृतिक आधार रेखा स्थितियों में पाए गए। मत्स्य पालन और पर्यटन बिना किसी आजीविका हानि की रिपोर्ट के जारी रहा। अध्ययन में कहा गया कि आकलन अवधि के दौरान प्रदूषक लक्षद्वीप तक नहीं पहुँचे, जबकि केरल के दक्षिणी तट पर नर्डल बहकर आए।
यह दावा कि जहाज के मलबे ने लक्षद्वीप को तबाह कर दिया, इस आकलन से समर्थित नहीं है। लेकिन इसके विपरीत दावा कि द्वीपों को कोई गंभीर खतरा नहीं है, उतना ही लापरवाह होगा। यहाँ की प्रवाल भित्तियाँ, भूजल और अपशिष्ट प्रणालियाँ विशेषकर व्यस्त शिपिंग मार्गों पर भविष्य की किसी दुर्घटना के प्रति संवेदनशील बनी हुई हैं। व्यावहारिक परीक्षण यह है कि क्या अधिकारी अगले तेल रिसाव से पहले द्वीप-विशिष्ट प्रतिक्रिया योजनाएँ, प्रारंभिक चेतावनी और निगरानी स्थापित करते हैं, न कि बाद में।
स्रोत: thehindu.com
यह कहानी ऊपर दिए गए स्रोत से AI द्वारा संश्लेषित की गई है।