
Senior Congress leader Siddaramaiah, who has kept a low profile since stepping down as Karnataka chief minister two months ago, told reporters on Saturday that he is not silent but simply does…
वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने शनिवार को पत्रकारों से कहा कि वे खामोश नहीं हैं बल्कि कम बोलते हैं। दो महीने पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद से ही वे कम सक्रिय हैं। बेंगलुरु में संगोली रायन्ना की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद उन्होंने यह बात कही। डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक सिद्धारमैया इस बात से नाराज बताए जा रहे हैं कि कुरुबा विधायक बसवराज शिवन्नावर को कैबिनेट में शामिल करने जैसी उनकी सिफारिशें मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने नहीं मानीं।
कैबिनेट में महिलाओं की अनुपस्थिति पर पूछे गए सवाल पर सिद्धारमैया ने कहा कि उन्होंने पार्टी आलाकमान से कहा है कि एक महिला मंत्री को जल्द शामिल किया जाएगा। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास कोई अल्पसंख्यक मंत्री नहीं था। अहिंदा समूह के बारे में उन्होंने कहा कि इसकी रजत जयंती समारोह की तैयारियां चल रही हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि 2028 के विधानसभा चुनावों के लिए सिद्धारमैया कांग्रेस के लिए अब भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।
बेंगलुरु के गलियारों में चर्चा है कि सिद्धारमैया हाशिए पर जाने से नाराज हैं। हालांकि उनकी नपी-तुली टिप्पणियां बताती हैं कि वे जल्दबाजी में कोई कदम उठाने के बजाय सही समय का इंतजार कर रहे हैं। कांग्रेस आलाकमान दो कद्दावर राज्य नेताओं के बीच फंसा हुआ है। एक गुट उन्हें अप्रासंगिक मानता है तो दूसरा मानता है कि कुरुबा, दलित और मुस्लिम वोट बैंक पर उनकी पकड़ मजबूत है। असली परीक्षा यह होगी कि खाली कैबिनेट सीट पर किसी महिला को जगह मिलती है या सिद्धारमैया की पसंद के कुरुबा नेता को। इससे साफ हो जाएगा कि सत्ता की असली बागडोर किसके हाथ में है।
स्रोत: deccanherald.com
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