बंदी संजय की AIMIM को चुनौती, राशन कार्ड पर कांग्रेस पर साधा निशाना

Bandi Targets AIMIM, Cong. Over Vande Mataram, Ration Cards

Union minister Bandi Sanjay Kumar on Saturday challenged AIMIM to stop a mass Vande Mataram recital planned at Charminar's Bhagyalakshmi Temple, accusing the party of boycotting the national song in the Assembly.…

संक्षेप में खबर

केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार ने शनिवार को एआईएमआईएम को चुनौती दी कि वे चारमीनार स्थित भाग्यलक्ष्मी मंदिर में प्रस्तावित सामूहिक वंदे मातरम गायन को रोक कर दिखाएं। उन्होंने पार्टी पर विधानसभा में राष्ट्र गीत का बहिष्कार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र गीत का अपमान करने पर तीन साल की जेल हो सकती है। भाजपा की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने स्मार्ट राशन कार्ड को लेकर कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा जिसमें मुख्यमंत्री की फोटो तो है लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नहीं। संजय ने कहा कि केंद्र सरकार तेलंगाना में 57 लाख राशन कार्डों के जरिए लगभग 2 करोड़ लोगों को मुफ्त चावल मुहैया कराती है और उन्होंने सवाल किया कि यदि केंद्रीय फंड का इस्तेमाल किया जा रहा है तो प्रधानमंत्री की तस्वीर क्यों गायब है।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार केंद्रीय योजनाओं का श्रेय लेती है जो कि पिछली बीआरएस सरकार से विरासत में मिली आदत है। संजय ने राज्य के करीब साढ़े तीन करोड़ की आबादी में से 3.43 करोड़ लोगों को मुफ्त चावल बांटने के दावे पर सवाल उठाए और पूछा कि क्या 30 लाख आयकरदाताओं को भी मुफ्त राशन दिया जा रहा है। उन्होंने लंबित शुल्क प्रतिपूर्ति और अधूरे वादों को लेकर भी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि तेलंगाना की 2.77 करोड़ एकड़ भूमि में से 95 लाख एकड़ जमीन को रजिस्ट्रेशन एक्ट की धारा 22ए के तहत प्रतिबंधित सूची में रखा गया है जिससे असली मालिकों को परेशानी हो रही है।

द इंडियन ओपिनियन

केंद्रीय मंत्री बंदी संजय का वंदे मातरम का दांव ध्रुवीकरण वाला है लेकिन स्मार्ट राशन कार्ड का सवाल अधिक तीखा है। जब केंद्रीय फंड तेलंगाना के 2 करोड़ लाभार्थियों का पेट भर रहा है तो प्रधानमंत्री की फोटो क्यों हटाई गई। यदि राज्य सरकार केवल केंद्र का चावल आगे बांट रही है तो इस स्रोत को छिपाना बेईमानी है। धारा 22ए के तहत जमीन को फ्रीज करने के मुद्दे पर भी स्पष्टता चाहिए। क्या राज्य सरकार यह बताएगी कि 95 लाख एकड़ जमीन में से कितने मामले असली विवाद हैं। जब तक ऐसा नहीं होता तब तक मतदाताओं के हाथ केवल नारे ही लगेंगे।


स्रोत: deccanchronicle.com

यह खबर ऊपर दिए गए स्रोत से एआई द्वारा तैयार की गई है।

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