
India has built substantial electronic warfare capabilities, but its own drones remain vulnerable to jamming and signal disruption, Frontline reports. DRDO’s Samyukta ground system covers a 100-km-by-70-km area, while naval and counter-drone…
फ्रंटलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में मजबूत क्षमता बनाई है, लेकिन उसके अपने ड्रोन जैमिंग और सिग्नल विघटन के प्रति संवेदनशील बने हुए हैं। DRDO की साम्युक्ता जमीनी प्रणाली 100 किमी * 70 किमी के क्षेत्र को कवर करती है, जबकि नौसेना और ड्रोन-रोधी कार्यक्रम अवरोधन, जैमिंग और स्पूफिंग क्षमताएं जोड़ते हैं। निजी कंपनियों ने भी हैंडहेल्ड और AI-सक्षम ड्रोन-रोधी सिस्टम विकसित किए हैं।
कमी भारत के मानवरहित हवाई वाहनों में है, जिनमें कठोर डेटा लिंक और विद्युतचुंबकीय वातावरण के लिए स्वायत्तता का अभाव है। प्रोजेक्ट प्रज्ञाशक्ति, समर्पित इलेक्ट्रॉनिक युद्ध ब्रिगेड और धाराशक्ति के लिए 5,150 करोड़ रुपये के उन्नयन का उद्देश्य क्षमताओं को एकीकृत और विस्तारित करना है। IIT कानपुर में प्रस्तावित 500 करोड़ रुपये के राष्ट्रीय सैन्य ड्रोन प्रौद्योगिकी हब का ध्यान एन्क्रिप्टेड, फ़्रीक्वेंसी-हॉपिंग और जैम-प्रतिरोधी लिंक पर होगा।
आसान कहानी यह है कि भारत ने या तो इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की समस्या हल कर ली है या ड्रोन के सामने असहाय है। यहाँ कोई भी बात समर्थित नहीं है। भारत शत्रु प्रणालियों को बाधित कर सकता है, लेकिन वह लाभ अपने बेड़े की कमजोरियों को भी उजागर कर सकता है। परियोजनाओं की घोषणा और जैमर खरीदने से मामला नहीं सुलझेगा। व्यावहारिक परीक्षण यह है कि क्या हर नए सैन्य ड्रोन में एक सिद्ध, एन्क्रिप्टेड और फ़्रीक्वेंसी-हॉपिंग लिंक है जो लगातार जैमिंग के तहत भी काम करता रहे।
स्रोत: frontline.thehindu.com
यह कहानी ऊपर दिए गए स्रोत से AI द्वारा संश्लेषित की गई थी।