
Journalist Kuldip Nayar's autobiography 'Beyond the Lines' recounts that Muhammad Ali Jinnah, after seeing streams of refugees from a Dakota aircraft over Punjab in August 1947, struck his forehead and said in…
वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नय्यर की आत्मकथा बियॉन्ड द लाइन्स में उल्लेख है कि पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना ने 1947 के विभाजन के दौरान पंजाब से पलायन करते शरणार्थियों का तांता देख अपना माथा पीट लिया और कहा था कि मैंने क्या कर दिया। सियालकोट से दिल्ली आए नय्यर ने वाघा के पास सड़क पर लाशों और लूटे गए सामान के मंजर को भी बयां किया है।
यह टिप्पणी मजहर अली खान की पत्नी ताहिरा द्वारा उनके पति की मृत्यु के वर्षों बाद किए गए एक गोपनीय खुलासे से सामने आई। जिन्ना का यह कथित अफसोस और नय्यर की प्रत्यक्षदर्शी रिपोर्ट विभाजन की उस असीम मानवीय त्रासदी को रेखांकित करती है जिसे भारत हर साल 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाता है।
जिन्ना की कथित पीड़ा चौंकाने वाली है लेकिन इस डर से इनकार नहीं किया जा सकता कि इसका इस्तेमाल उनकी भूमिका को पाक साफ दिखाने या राजनीतिक स्कोर सेट करने के लिए किया जाए। सच यह है कि विभाजन कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों की सहमति से हुआ और इसके बाद होने वाली हिंसा के लिए कोई ठोस योजना नहीं थी। एक सवाल आज भी बना हुआ है कि क्या जिन्ना ने कभी सार्वजनिक रूप से अपने इस दुख को स्वीकार किया या यह केवल एक निजी टिप्पणी थी जो उनके द्वारा लिए गए निर्णयों में कोई बदलाव नहीं ला सकी।
स्रोत: rediff.com
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