
SEBI has revised net distributable cash flow (NDCF) rules for infrastructure investment trusts (InvITs), allowing debt-funded major maintenance costs for road projects to be added back when calculating cash available for distribution.…
सेबी ने इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) के लिए नेट डिस्ट्रिब्यूटेबल कैश फ्लो (NDCF) नियमों में बदलाव किया है। इसके तहत अब सड़क परियोजनाओं के लिए कर्ज लेकर किए गए बड़े रखरखाव खर्च को वितरण के लिए उपलब्ध नकदी की गणना करते समय वापस जोड़ा जा सकता है। शुक्रवार से प्रभावी हुए ये बदलाव उद्योग जगत की मांगों और सेबी की हाइब्रिड सिक्योरिटीज एडवाइजरी कमेटी की सिफारिशों के बाद लागू किए गए हैं।
इन बदलावों के साथ कई सुरक्षा उपाय भी जोड़े गए हैं। इनमें कम से कम 60 फीसदी मतों के साथ यूनिटधारकों की मंजूरी अनिवार्य है। साथ ही परियोजना-वार खर्चों का खुलासा करना और भविष्य की वृद्धि पर उनके प्रभाव को बताना जरूरी होगा। इसके अलावा वैधानिक लेखा परीक्षक से यह प्रमाणन लेना होगा कि खर्च रियायती समझौतों के अनुरूप हैं। सेबी ने बड़े रखरखाव के लिए लिए गए कर्ज का अलग से खुलासा करने का भी निर्देश दिया है जिसमें ऋण स्तर और परिपक्वता प्रोफाइल की जानकारी शामिल है।
आम धारणा यह है कि सेबी का यह कदम इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्टों के लिए एक रियायत है। लेकिन सुरक्षा उपाय एक अलग तस्वीर पेश करते हैं। 60 फीसदी वोट थ्रेशोल्ड के साथ यूनिटधारकों की मंजूरी, वैधानिक लेखा परीक्षक का प्रमाणन और अलग से कर्ज का खुलासा जैसी शर्तें इसमें शामिल हैं। असली परीक्षा यह होगी कि क्या निवेशक इन प्रस्तावों को मंजूरी देते हैं या नहीं। यह भी देखना होगा कि क्या यह एकमुश्त मंजूरी बार-बार कर्ज लेने का जरिया तो नहीं बन जाएगी। यदि सड़क की गुणवत्ता में सुधार के बिना वितरण अनुपात तेजी से बढ़ता है तो नियामक को इन सीमाओं की समीक्षा करनी पड़ सकती है।
स्रोत: thehindubusinessline.com
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