
The Shimla district administration has asked the Geological Survey of India (GSI) to assess land subsidence in Shakrala village, where cracks have appeared in around 150 houses over the past two years.…
शिमला जिला प्रशासन ने जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) से शकराला गांव में जमीन धंसने की समस्या का आकलन करने को कहा है। यहां पिछले दो वर्षों में लगभग 150 घरों में दरारें देखी गई हैं। मानसून के दौरान यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने बताया कि प्रशासन ने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से भी विशेषज्ञ सलाह मांगी है। अधिकारियों ने उप-मंडल मजिस्ट्रेटों और तहसीलदारों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। कश्यप ने कहा कि GSI की रिपोर्ट आने से पहले निर्माण कार्यों समेत किसी भी एक कारण को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी।
बुनियादी ढांचे के समर्थकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर फिलहाल जल्दबाजी है। प्रशासन ने सही कदम उठाते हुए कारण बताने से पहले भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने का फैसला लिया है। अब अहम यह है कि क्या GSI की रिपोर्ट भूजल में कमी, अनियंत्रित निर्माण या किसी गहरी टेक्टोनिक हलचल को जिम्मेदार ठहराती है। यदि एजेंसी निष्पक्ष रूप से जांच करती है तो स्थानीय निवासियों को अस्थायी मरहम के बजाय स्थायी समाधान मिल सकता है।
स्रोत: hindustantimes.com
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