
More than 61 per cent of Scheduled Caste households in Telangana own no land, and only 0.68 per cent have crop insurance, a study by the Centre for Economic and Social Studies…
सेंटर फॉर इकोनॉमिक एंड सोशल स्टडीज (CESS) के एक अध्ययन से पता चला है कि तेलंगाना में 61 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जाति के परिवारों के पास अपनी जमीन नहीं है और केवल 0.68 प्रतिशत के पास ही फसल बीमा की सुविधा है। इस सर्वेक्षण में सभी 33 जिलों, 300 गांवों और 100 शहरी वार्डों के 10,213 अनुसूचित जाति परिवारों को शामिल किया गया था।

भूमिहीनता के कारण अनुसूचित जाति के किसान रायथु भरोसा और रायथु बीमा जैसी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। अध्ययन में यह भी पाया गया कि ग्रामीण अनुसूचित जाति के 70.9 प्रतिशत परिवार सिंचाई के लिए बोरवेल पर निर्भर हैं जबकि नहरों और सतही जल तक उनकी पहुंच सीमित बनी हुई है।

यह अध्ययन उस दांव को खारिज करता है कि तेलंगाना की कृषि योजनाएं समावेशी हैं। आंकड़े बताते हैं कि सबसे गरीब दलित किसान व्यवस्थित रूप से बाहर हैं क्योंकि उनके पास भूमि का मालिकाना हक नहीं है। बीमा कवरेज लगभग शून्य है। राज्य को खुद से यह पूछना चाहिए कि क्या उसकी प्रमुख योजनाएं भूमिहीनों तक पहुंच रही हैं या केवल मौजूदा असमानताओं को गहरा कर रही हैं। एक ठोस परीक्षा यह होगी कि क्या अगला राज्य बजट भूमिहीन अनुसूचित जाति के कृषि श्रमिकों के लिए समर्पित आवंटन शामिल करेगा।
स्रोत: siasat.com
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