
Three alleged poachers were killed after an exchange of fire with forest personnel in Karnataka’s Cauvery Wildlife Sanctuary around 5.10 am on Saturday. Forest Minister Ramalinga Reddy said personnel had followed a…
शनिवार सुबह करीब 5.10 बजे कर्नाटक के कावेरी वन्यजीव अभयारण्य में वनकर्मियों के साथ हुई गोलीबारी में तीन कथित शिकारियों की मौत हो गई। वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने बताया कि कर्मियों ने टॉर्च की रोशनी का पीछा करते हुए चार लोगों को रोका था जो कथित तौर पर दो देसी पिस्तौल और हिरण के मांस से भरे चार बैग ले जा रहे थे। उन्होंने कहा कि दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और एक अन्य ने अस्पताल में दम तोड़ दिया जबकि चौथा भागने में सफल रहा। वन विभाग की टीम ने इसे आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बताया है।

मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने दंडाधिकारी जांच के आदेश दिए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि गोलीबारी सोची समझी थी या आत्मरक्षा में की गई। पुलिस सूत्रों ने मृतकों की पहचान हनूर तालुक के थोमियारपाल्या के निवासियों के रूप में की है। परिजनों ने कथित तौर पर वन कार्यालय में तोड़फोड़ की और चामराजनगर व मैसूरु में विरोध प्रदर्शन हुए। मृतकों का पोस्टमार्टम मैसूरु में कराया गया है।

आसान नैरेटिव पहले से ही बन रहे हैं। एक पक्ष वन विभाग के बयान को अंतिम सत्य मान सकता है तो दूसरा पक्ष सबूतों की जांच से पहले ही इसे हत्या करार दे सकता है। दोनों ही तरीके उचित नहीं हैं। जांच में हथियारों बैलिस्टिक साक्ष्यों पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चश्मदीदों के बयानों का बारीकी से विश्लेषण किया जाना चाहिए और यदि प्रक्रियाओं का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। इस रिपोर्ट को एक बुनियादी सवाल का जवाब देना होगा कि गोली सबसे पहले किसने चलाई?
स्रोत (2): hindustantimes.com, thefederal.com
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