
Mahindra & Mahindra has set a target to capture 5% of the heavy truck market, using onboard AI, fuel-efficiency gains and uptime guarantees, the Economic Times reports. The company, which already holds…
द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार महिंद्रा एंड महिंद्रा ने ऑनबोर्ड एआई, ईंधन दक्षता में सुधार और अपटाइम की गारंटी के जरिए भारी ट्रकों के बाजार में 5% हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य रखा है। यात्री वाहनों के बाजार में पहले से ही नंबर 2 की मजबूत स्थिति रखने वाली यह कंपनी अपनी हाल ही में अधिग्रहित इकाई एसएमएल महिंद्रा का उपयोग अपने कमर्शियल वाहन पोर्टफोलियो की कमियों को दूर करने और टाटा मोटर्स तथा अशोक लेलैंड जैसी दिग्गज कंपनियों को चुनौती देने के लिए कर रही है।
ट्रक्स एंड बसेस के प्रेसिडेंट विनोद सहाय ने मिंट को बताया कि अगले दो वर्षों में दो नए इंजन विकसित किए जा रहे हैं। इससे इंटरमीडिएट कमर्शियल वाहनों में महिंद्रा की मौजूदा 4-4.5% हिस्सेदारी को दोगुना करने में मदद मिलेगी। कंपनी 16-18 टन के दो-एक्सल वाले ट्रकों में विस्तार करने की योजना बना रही है और शुरुआत में इलेक्ट्रिक स्कूल व स्टाफ बसों पर ध्यान केंद्रित करेगी। कंपनी पीएम ई-ड्राइव के तहत सब्सिडी वाली सिटी ई-बस श्रेणी से दूर रहेगी।
टाटा और अशोक लेलैंड को चुनौती देने वाली महिंद्रा की सुर्खियां कॉरपोरेट शेखी लग सकती हैं लेकिन कंपनी का यात्री वाहनों में महत्वाकांक्षी योजनाओं को पूरा करने का पुराना रिकॉर्ड है। हालांकि भारी ट्रकों का खेल अलग है। यहां कार शोरूम की चमक-धमक से ज्यादा विश्वसनीयता, सर्विस नेटवर्क और लंबी दूरी का भरोसा मायने रखता है। असली परीक्षा 5% का लक्ष्य नहीं बल्कि यह है कि क्या दो साल में आने वाले नए इंजन स्थापित कंपनियों की टिकाऊ क्षमता का मुकाबला कर पाएंगे। वास्तविक प्रगति को समझने के लिए केवल घोषणाओं पर नहीं बल्कि वित्त वर्ष 2028 में महिंद्रा की आईसीवी बाजार हिस्सेदारी के आंकड़ों पर नजर रखें।
स्रोत (2): auto.economictimes.indiatimes.com, livemint.com
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