
A CAG audit has found that Indian Railways diverted Rs 3,400 crore from the Rashtriya Rail Sanraksha Kosh (RRSK), a safety fund, to staff welfare and computerisation, reducing resources for critical safety…
सीएजी की एक ऑडिट में पता चला है कि भारतीय रेलवे ने सुरक्षा के लिए निर्धारित राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष (आरआरएसके) से 3,400 करोड़ रुपये हटाकर कर्मचारी कल्याण और कंप्यूटरीकरण पर खर्च कर दिए हैं जिससे महत्वपूर्ण सुरक्षा कार्यों के लिए संसाधन कम हो गए हैं। इस कोष के लिए 2017-25 के दौरान 1,27,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया था लेकिन रेलवे ने अपने आंतरिक संसाधनों से लक्ष्य के मुकाबले मात्र 21.3 प्रतिशत यानी 25,000 करोड़ के बदले केवल 5,324.62 करोड़ रुपये का ही योगदान दिया।
रेलवे के 20,000 से अधिक सुरक्षा कार्य अधूरे पड़े हैं जिससे रेल परिचालन जोखिम में है। इसके अलावा रेलवे ने बजटीय सहायता से 22,699 करोड़ रुपये का खर्च आईआरएफसी को लीज शुल्क चुकाने में किया जिसे सीएजी ने गलत माना है। वित्त वर्ष 2025 में बिना मंजूरी का खर्च दोगुना होकर 19,458 करोड़ रुपये हो गया है।
सीएजी की रिपोर्ट सुरक्षा और दिखावे के बीच का अंतर उजागर करती है। रेलवे ने सुरक्षा के पैसे को अन्य कार्यों में लगाया और अब फंड की कमी का बहाना बना रहा है। आमतौर पर इसके लिए नौकरशाहों को दोषी ठहराया जाता है लेकिन असली सवाल यह है कि मंत्रालय अदृश्य सुरक्षा के बजाय दिखावटी सुविधाओं को प्राथमिकता क्यों दे रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि वित्त वर्ष 2026 में 1,27,000 करोड़ रुपये के आरआरएसके कोष का कितना हिस्सा वास्तव में ट्रैक नवीनीकरण पर खर्च होता है। यह आंकड़े ही इस बहस का असली जवाब देंगे।
सूत्र (2): businesstoday.in, rediff.com
यह खबर ऊपर दिए गए दो स्रोतों से एआई द्वारा तैयार की गई है।