
The government has drawn up a ₹10,000-crore plan to expand India's operational waterways, aiming to bring more than 50 national waterways into service well before the Maritime Amrit Kaal Vision 2047 target.…
सरकार ने परिचालन जलमार्गों के विस्तार के लिए 10,000 करोड़ रुपये की योजना तैयार की है, जिसका उद्देश्य मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 के लक्ष्य से काफी पहले 50 से अधिक राष्ट्रीय जलमार्गों को सेवा में लाना है। मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय जलमार्गों पर माल ढुलाई 2014-15 में 29 मिलियन टन से बढ़कर 2025-26 में 218 मिलियन टन हो गई, जो सरकार के 2030 के 200 मिलियन टन के लक्ष्य को पार कर गई है। 2016 अधिनियम के तहत घोषित 111 राष्ट्रीय जलमार्गों में से, 5,155 किमी तक फैले 32 जलमार्ग अब परिचालन में हैं।

यह योजना जलमार्गों को औद्योगिक क्लस्टर, बंदरगाहों और सड़क-रेल नेटवर्क से जुड़े आर्थिक गलियारों के रूप में विकसित करने पर केंद्रित है। मिंट द्वारा उद्धत विशेषज्ञों ने सभी 111 जलमार्गों को एक समान विकसित करने के प्रति आगाह किया है। उन्होंने साल भर नौगम्यता और निजी निवेश क्षमता वाले व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य खंडों को प्राथमिकता देने की सलाह दी है। दिसंबर 2024 में शुरू की गई जलवाहक योजना, निर्धारित मार्गों पर माल ढुलाई को अंतर्देशीय जलमार्गों पर स्थानांतरित करने के लिए माल मालिकों को परिचालन लागत का 35% तक प्रोत्साहन प्रदान करती है।
सहायक बुनियादी ढांचे का विकास चल रहा है, जिसमें असम के पांडु में एक जहाज मरम्मत सुविधा और वाराणसी में 70 एकड़ का माल गांव शामिल ह।ै यात्री यातायात 2024-25 में 77.6 मिलियन से बढ़कर 2025-26 में 105 मिलियन हो गई। सरकार ने 19 अतिरिक्त जलमार्गों की भी पहचान की है, जो मुख्य रूप से क्रूज पर्यटन और नौकाओं के लिए हैं, जिनमें भविष्य में माल ढुलाई के लिए संभावित उन्नयन किए जा सकते हैं। बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने परियोजना पर मिंट के सवालों का जवाब नहीं दिया।
स्रोत: livemint.com
यह कहानी उपरोक्त स्रोत से एआई द्वारा संश्लेषित की गई थी।