
A study from Rajasthan's Aravalli hills has found that sloth bears help shape dry deciduous forests by dispersing viable seeds and influencing plant regeneration. The research was conducted in the Kumbhalgarh and…
राजस्थान की अरावली पहाड़ियों में हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि स्लॉथ भालू व्यवहार्य बीजों का प्रसार करके और पादप पुनर्जनन को प्रभावित करके शुष्क पर्णपाती वनों को आकार देने में मदद करते हैं। यह शोध कुंभलगढ़ और तोडगढ़-रावली वन्यजीव अभयारण्यों में किया गया, जो लगभग 1,100 वर्ग किमी के शुष्क पर्णपाती वन, झाड़ीदार भूमि और घास के मैदानों को कवर करता है।

शोधकर्ताओं ने नवंबर 2021 और जुलाई 2022 के बीच 180 मल के नमूने एकत्र किए। उन्होंने पाया कि भालू सर्दियों में फल-समृद्ध आहार से गर्मियों में कीट-समृद्ध आहार पर स्विच करते हैं। सर्दियों के 80% से अधिक मल नमूनों में चींटियाँ पाई गईं, जबकि गर्मियों के आधे से अधिक नमूनों में दीमक पाए गए। अध्ययन में यह भी पाया गया कि आक्रामक झाड़ी लैंटाना कैमारा के बीज स्लॉथ भालू के पाचन तंत्र से गुज़रने के बाद ही अंकुरित हुए, जो बताता है कि ये जानवर आक्रामक प्रजातियों को फैलाने में भी मदद कर सकते हैं।
सह-लेखक के.एस. गोपी सुंदर ने कहा कि अध्ययन से पता चलता है कि भालू कई पादप प्रजातियों को प्राकृतिक रूप से अधिक और तेज़ी से अंकुरित होने में प्रभावित करते हैं। लेखकों ने नोट किया कि अध्ययन अवधि के दौरान असामान्य ला नीना मौसम ने संभवतः गर्मियों में कीड़ों को अधिक सुलभ बना दिया। ये निष्कर्ष वन संरचना को बनाए रखने में स्लॉथ भालू की भूमिका को उजागर करते हैं।

स्रोत: india.mongabay.com
यह कहानी उपरोक्त स्रोत से AI द्वारा संश्लेषित की गई है।