
Maharashtra's culinary identity is undergoing a transformation as chefs and restaurants turn away from Western influences to spotlight hyper-local micro-cuisines, indigenous ingredients, and traditional techniques. Freepressjournal.in reports that for decades, Maharashtrian food…
महाराष्ट्र की पाक-कला पहचान में बड़ा बदलाव आ रहा है। शेफ और रेस्तरां पश्चिमी प्रभावों से हटकर हाइपर-लोकल सूक्ष्म व्यंजनों, स्थानीय सामग्रियों और पारंपरिक तकनीकों को उजागर कर रहे हैं। फ्रीप्रेस जर्नल डॉट इन की रिपोर्ट के अनुसार, दशकों तक शहरी भारत में महाराष्ट्रीय भोजन कुछ खास स्टीरियोटाइप तक सीमित रहा, लेकिन अब एक नई लहर राज्य की विविध पाक-कला जड़ों का जश्न मना रही है।
कोकण तट समुद्री भोजन और चावल आधारित व्यंजनों में अग्रणी है, जिनमें नारियल, मिर्च, कोकम और तिरफाल का प्रयोग होता है। मुंबई को भारत का प्रवासी शहर बताया जाता है, जिसने कोली, पाठारे प्रभु और बेने इजराइली जैसे समुदायों के प्रभाव को आत्मसात किया है। आसवाद और प्रकाश जैसे प्रतिष्ठित संस्थान शाकाहारी क्लासिक्स को बढ़ावा देते हैं, जबकि फ्रेनीज, मासली और द मराठा किचन जैसे नए रेस्तरां प्रामाणिक क्षेत्रीय व्यंजनों के साथ रूढ़ियों को तोड़ रहे हैं।
द बॉम्बे कैंटीन और मस्क जैसे आधुनिक फाइन-डाइनिंग अग्रदूतों ने भूली-बिसरी मौसमी सामग्रियों को नक्शे पर ला दिया है। यह चलन एका, स्लिंक एंड बार्डोट और कोस्ट एंड ब्लूम जैसे प्रतिष्ठानों के साथ-साथ होम शेफ सौमित्र वेलकर और रेशमा माने के साथ भी जारी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विरासत अब नया अवंत-गार्डे बन गई है, और इसमें कोई कमी नहीं दिख रही है।
स्रोत: freepressjournal.in
यह कहानी ऊपर दिए गए स्रोत से AI द्वारा संश्लेषित की गई है।