
More than half of American renter families are now rent-burdened, spending over 30% of income on housing, according to Zillow. The median annual rent for a two-bedroom home nationwide is $21,480. Among…
जिलौ (Zillow) के अनुसार अमेरिका में आधे से अधिक किराएदार परिवार अब किराए के बोझ तले दबे हैं और वे अपनी आय का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आवास पर खर्च कर रहे हैं। देश भर में दो बेडरूम वाले घर का औसत वार्षिक किराया 21,480 डॉलर है। 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों वाले परिवारों में यह आंकड़ा बढ़कर 54 प्रतिशत तक पहुंच गया है। 2008 के वित्तीय संकट के बाद दो दशकों तक कम निर्माण कार्य होने के कारण लगभग 47 लाख घरों की कमी पैदा हुई है। यही वजह है कि महंगाई दर धीमी होने के बावजूद ज्यादा परिवार रेंटल मार्केट की तरफ बढ़ रहे हैं और कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं।
शहरों के हिसाब से खर्च में काफी अंतर है। न्यूयॉर्क में दो बेडरूम का किराया सालाना 57,000 डॉलर है। वहीं सैन जोस में यह 47,136 डॉलर और सैन फ्रांसिस्को में 38,400 डॉलर है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के मुताबिक कम आय वाले परिवारों पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है। वर्ष 2024 में 30,000 डॉलर से कम सालाना कमाने वाले 80 प्रतिशत से अधिक किराएदार आवास लागत के बोझ से दबे थे। जिलौ के अर्थशास्त्री केनी ली ने सीबीएस न्यूज को बताया कि ज़ोनिंग प्रतिबंधों और नियामक बाधाओं ने आपूर्ति को बाधित कर रखा है। इस साल हस्ताक्षरित एक द्विदलीय आवास विधेयक का उद्देश्य निर्माण को बढ़ावा देना है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि किराया कम होने में अभी समय लगेगा।
अक्सर यह धारणा बनाई जाती है कि अमेरिकी आवास संकट केवल बाजार का सुधार है या यह समस्या केवल तटीय क्षेत्रों के अभिजात्य वर्ग तक सीमित है। टाइम्स ऑफ इंडिया के जिलौ डेटा से पता चलता है कि 54 प्रतिशत परिवार किराए के बोझ से दबे हैं और 30,000 डॉलर से कम कमाने वाले 80 प्रतिशत लोग सबसे अधिक प्रभावित हैं। यह 47 लाख घरों की संरचनात्मक कमी है न कि कोई चक्रीय गिरावट। असली परीक्षा यह है कि क्या इस साल लागू हुआ द्विदलीय आवास विधेयक वास्तव में निर्माण कार्य में तेजी लाएगा या यह केवल ज़ोनिंग नियमों में उलझा रहेगा। क्या अगली पीढ़ी के बाजार से बाहर होने से पहले आपूर्ति की स्थिति सुधर पाएगी?
स्रोत: timesofindia.indiatimes.com
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