अपोलो 8 से पहले 1968 में सोवियत कछुओं ने लगाई चंद्रमा की परिक्रमा

In 1968, two Soviet tortoises circled the Moon and returned alive before Apollo 8

In September 1968, three months before Apollo 8, two Central Asian steppe tortoises launched aboard the Soviet Zond 5 spacecraft became the first living organisms to circle the Moon and return alive.…

संक्षेप में खबर

सितंबर 1968 में अपोलो 8 मिशन से तीन महीने पहले सोवियत ज़ोंड 5 अंतरिक्ष यान से भेजे गए दो मध्य एशियाई कछुए चंद्रमा की परिक्रमा कर जीवित वापस आने वाले पहले जीव बने। उन्होंने जैविक पेलोड के तौर पर वाइन मक्खियों, कीड़ों और पौधों के साथ यह यात्रा की थी ताकि चंद्रमा के चारों ओर की उड़ान में जीवित रहने की क्षमता जांची जा सके। इस दौरान यान चंद्रमा के पिछले हिस्से से 1,950 किलोमीटर की ऊंचाई से गुजरा था।

नेविगेशन में खराबी के कारण ज़ोंड 5 सोवियत क्षेत्र के बजाय हिंद महासागर में जा गिरा। सोवियत जहाज द्वारा बरामद किए गए कछुओं को मॉस्को ले जाया गया जहां वे कुछ वजन घटने के अलावा पूरी तरह स्वस्थ पाए गए। नासा के अनुसार इस सफलता ने ही अमेरिका को अपोलो 8 के मानव मिशन की तैयारी तेज करने के लिए मजबूर किया था।

द इंडियन ओपिनियन

कछुओं की यह यात्रा उस प्रचलित धारणा को चुनौती देती है कि अंतरिक्ष दौड़ केवल अमेरिका की ही उपलब्धि थी। सोवियत संघ ने चुपचाप एक ऐसा जैविक मील का पत्थर हासिल किया जिसने सीधे तौर पर अपोलो 8 की समयसीमा को प्रभावित किया। जैसे-जैसे भारत अपने गगनयान मिशन की योजना बना रहा है असली परीक्षा यह होगी कि क्या इसमें मानव जीवन को जोखिम में डालने से पहले सुरक्षा जांच के लिए जानवरों पर इसी तरह के प्रयोग किए जाएंगे।


स्रोत: timesofindia.indiatimes.com

यह खबर ऊपर दिए गए स्रोत से एआई द्वारा संकलित की गई है।

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