
A new study by Indian Institute of Management Indore has found that managers who choose a 'good enough' solution instead of always seeking the perfect outcome can reduce uncertainty in short-duration projects.…
भारतीय प्रबंधन संस्थान इंदौर के एक नए अध्ययन में पाया गया है कि जो प्रबंधक हमेशा पूर्ण परिणाम की तलाश करने के बजाय ‘काफी अच्छा’ समाधान चुनते हैं, वे अल्पकालिक परियोजनाओं में अनिश्चितता को कम कर सकते हैं। प्रोफेसर ससांका शेखर चंदा द्वारा किया गया यह शोध Computational and Mathematical Organization Theory में प्रकाशित हुआ है।

यह अध्ययन डंकन के संगठनात्मक अनिश्चितता के सिद्धांत में एक तीसरा कारक जोड़ता है: प्रबंधक कैसे निर्णय लेते हैं। प्रोफेसर चंदा के मॉडल ने दो दृष्टिकोणों की तुलना की: अधिकतमीकरण (सर्वोत्तम परिणाम की तलाश) और संतोषजनकता (पर्याप्त सीमा को स्वीकार करना)। मॉडल में पाया गया कि संतोषजनकता ने छोटी परियोजनाओं में अनिश्चितता को कम किया, जिसमें सफलता की संभावना में केवल मामूली समझौता हुआ।
निष्कर्ष बताते हैं कि सही उत्तर की खोज संज्ञानात्मक दबाव और अनिश्चितता को बढ़ा सकती है, खासकर तेजी से बदलते वातावरण में। अध्ययन यह भी सुझाव देता है कि संगठनों को प्रबंधकों का मूल्यांकन उस अनिश्चितता के आधार पर करना चाहिए जिसे उन्होंने पार किया, न कि केवल परिणामों के आधार पर। इससे संज्ञानात्मक भार कम हो सकता है और ध्यान पूर्णता से हटकर सीखने और अनुकूलन की ओर जा सकता है।
स्रोत: freepressjournal.in
यह कहानी ऊपर दिए गए स्रोत से AI द्वारा संश्लेषित की गई है।