
India has auctioned 98 gigawatt-hours of battery energy storage capacity, but just 8.5 GWh is operational, NDTV Profit reports. The gap points to weak execution despite policies designed to support battery energy…
NDTV Profit की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने 98 गीगावाट-घंटा बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता नीलाम की है लेकिन केवल 8.5 GWh ही चालू है। यह अंतर बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के समर्थन के लिए बनी नीतियों के बावजूद कमजोर क्रियान्वयन को दर्शाता है।
NDTV Profit इस कमी का कारण सीमित घरेलू विनिर्माण, आयात पर निर्भरता और पावर ग्रिड में अस्थिरता को मानता है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि भंडारण क्षमता आवंटित करने की गति इसके निर्माण और संचालन से कहीं ज्यादा तेज रही है। ये नीतिगत ढांचे और जमीनी स्तर पर काम पूरे होने के बीच के अंतर को भी रेखांकित करते हैं।
यह कहना आसान है कि केवल नीलामियां साबित करती हैं कि भारत स्टोरेज-आधारित पावर सिस्टम के लिए तैयार है। इसके विपरीत यह दावा करना कि नीति पूरी तरह विफल रही है उतनी ही सतही सोच है। उपलब्ध आंकड़े एक संकुचित समस्या की ओर इशारा करते हैं कि क्षमता आवंटित तो हो गई है लेकिन डिलीवरी में देरी हो रही है। घरेलू विनिर्माण, आयात और ग्रिड की विश्वसनीयता यह तय करेगी कि यह अंतर मिटता है या नहीं। अगला महत्वपूर्ण पैमाना यह है कि 98 GWh में से कितनी क्षमता कब तक चालू होती है।
स्रोत: ndtvprofit.com
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