
Growing awareness is driving more women in their 40s to seek medical advice for perimenopause, reports Freepressjournal. In Maharashtra, 580 dedicated menopause clinics examined 31,288 women between January 14 and February 11,…
फ्रीप्रेसजर्नल की रिपोर्ट के अनुसार बढ़ती जागरूकता के चलते 40 की उम्र वाली ज्यादा महिलाएं पेरिमेनोपॉज के लिए चिकित्सा सलाह ले रही हैं। महाराष्ट्र में 14 जनवरी से 11 फरवरी 2026 के बीच 580 विशेष मेनोपॉज क्लीनिकों में 31,288 महिलाओं की जांच की गई जिनमें से 30,034 को उपचार मिला और 82 को विशेष देखभाल के लिए भेजा गया। इंडियन मेनोपॉज सोसाइटी के 2026 के दिशानिर्देशों के अनुसार भारत में 2011 में 45 से 49 वर्ष की महिलाओं की संख्या 3 करोड़ थी जो 2024 में बढ़कर करीब 4.6 करोड़ हो गई है।
खारघर के मदरहुड हॉस्पिटल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ सुरभि सिद्धार्थ ने बताया कि वह हर हफ्ते 40 से 50 वर्ष की दो से तीन ऐसी महिलाएं देखती हैं जिन्हें हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी की सलाह दी जाती है। लक्षणों में हॉट फ्लैश नींद में परेशानी मिजाज में बदलाव और थकान शामिल हैं। जीवनशैली में सुधार और व्यक्तिगत एचआरटी मुख्य उपचार हैं।
सालों तक पेरिमेनोपॉज को सिर्फ तनाव या बढ़ती उम्र का हिस्सा मानकर नजरअंदाज किया गया लेकिन आंकड़े बताते हैं कि यह लाखों महिलाओं को प्रभावित करने वाला एक गंभीर स्वास्थ्य चरण है। राज्य के क्लीनिकों में जांच कराई गई 31,288 महिलाओं में से केवल 82 को ही विशेष देखभाल की जरूरत पड़ी और अधिकांश मामलों का प्रबंधन प्राथमिक स्तर पर ही किया जा सकता है। असली परीक्षा यह है कि क्या महाराष्ट्र इस मॉडल को पूरे भारत के जिला अस्पतालों तक फैला सकता है।
स्रोत: freepressjournal.in
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