
NDTV reports that decades after Partition divided Punjab along the Radcliffe Line, the quest to preserve 'Punjabiyat', the shared Punjabi identity, continues on both sides of the border. The report examines how…
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार बंटवारे के दशकों बाद भी पंजाब की साझा पहचान यानी पंजाबियत को संजोने की कोशिशें सीमा के दोनों ओर जारी हैं। यह रिपोर्ट बताती है कि किस तरह राजनीतिक और धार्मिक दबावों के बावजूद भाषा संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखा जा रहा है।
जहाँ भारतीय पंजाब ने पंजाबी को आधिकारिक भाषा के रूप में बनाए रखने में सफलता पाई है वहीं पाकिस्तानी पंजाब में उर्दू के सामने इस भाषा को हाशिये पर धकेल दिया गया है और कार्यकर्ताओं को सरकारी विरोध का सामना करना पड़ा है। लोक संगीत और सूफी काव्य आज भी दोनों हिस्सों को जोड़ने वाले सूत्र बने हुए हैं लेकिन धार्मिक अंतर और राष्ट्रीय विमर्श ने पीढ़ियों के बीच अलगाव को गहरा कर दिया है।
अखंड पंजाब की पुरानी यादें अक्सर सीमा के दोनों ओर राज्य द्वारा प्रायोजित दमन और धार्मिक ध्रुवीकरण की कठोर वास्तविकताओं को नजरअंदाज कर देती हैं। भारत में भाषा आंदोलन सफल रहा लेकिन इसकी सांस्कृतिक जीत के पीछे पंजाबी समुदाय के भीतर मौजूद जातिगत और सांप्रदायिक विभाजन छिपे हुए हैं। पंजाबियत की असल परीक्षा इंटरनेट पर मौजूद शायरी नहीं है बल्कि यह है कि क्या दोनों देश स्कूलों अदालतों और दैनिक प्रशासन में पंजाबी को मिल रही उपेक्षा को खत्म करने के लिए कोई कदम उठाएंगे।
स्रोत: ndtv.com
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