
Researchers propose creating a 'theranostic digital twin', a computer model of an individual cancer patient, to simulate radioactive treatment outcomes before the actual drug is administered. The concept is detailed in a…
शोधकर्ताओं ने एक 'थेरानॉस्टिक डिजिटल ट्विन' बनाने का प्रस्ताव रखा है, जो किसी कैंसर रोगी का कंप्यूटर मॉडल होगा और वास्तविक दवा देने से पहले रेडियोधर्मी उपचार के परिणामों का अनुकरण कर सकेगा। यह अवधारणा फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल के स्वागत दाश और जिनेवा विश्वविद्यालय अस्पताल, रजवी अस्पताल तथा ईरान के बुशेहर मेडिकल यूनिवर्सिटी अस्पताल के वैज्ञानिकों द्वारा *फ्रंटियर्स इन बायोमेडिकल टेक्नोलॉजीज* में प्रकाशित एक पेपर में विस्तृत रूप से बताई गई है।
यह डिजिटल ट्विन स्कैन, रक्त परीक्षण और नैदानिक डेटा को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ जोड़कर यह अनुमान लगाएगा कि प्रोस्टेट कैंसर के लिए ल्यूटेटियम-177 पीएसएमए जैसे उपचारों पर ट्यूमर और स्वस्थ अंग कैसे प्रतिक्रिया देते हैं। सर्वोदय अस्पताल में परमाणु चिकित्सा के एसोसिएट निदेशक दाश ने कहा कि डॉक्टर यह देखने के लिए इंतजार करने के बजाय कि थेरेपी शुरू होने के बाद काम करती है या नहीं, वर्चुअल मॉडल पर विभिन्न विकल्पों की तुलना कर सकते हैं।
यह तकनीक अभी शोध चरण में है और इसके लिए बड़े मानकीकृत डेटासेट के साथ-साथ रोगी की स्थिति में बदलाव के अनुसार निरंतर अपडेट की आवश्यकता होती है। लेखकों का कहना है कि यह ट्विन डॉक्टरों का सहायक है, न कि उनका विकल्प। पेपर में उद्धृत पूर्व नैदानिक शोध में पाया गया कि जिन प्रोस्टेट कैंसर रोगियों के ट्यूमर ने अधिक पीएसएमए ट्रेसर अवशोषित किया, उनमें उपचार प्रतिक्रिया दर 91% थी, जबकि कम अवशोषण वाले रोगियों में यह 52% थी।
स्रोत: timesofindia.indiatimes.com
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