
Pakistan President Asif Ali Zardari said on August 14 that the country’s Muslims “tolerate” its Hindu population and claimed Hindus would rather remain in Pakistan than move to India. He also said…
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने 14 अगस्त को कहा कि देश के मुसलमान हिंदू आबादी को सहन करते हैं। उन्होंने दावा किया कि हिंदू भारत जाने के बजाय पाकिस्तान में रहना पसंद करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय अखंड भारत में विश्वास करते हैं और पाकिस्तान में हिंदुओं को अपना धर्म मानने की आजादी है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान की 2023 की जनगणना में 52 लाख हिंदू पाए गए जो कुल आबादी का 2.17 प्रतिशत है। यह संख्या जरदारी के 3 से 4 प्रतिशत के अनुमान से कम है। रिपोर्ट में मानवाधिकार समूहों के हवाले से बताया गया है कि पाकिस्तान का संविधान धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है लेकिन हिंदू और ईसाई लड़कियां जबरन धर्म परिवर्तन के प्रति असुरक्षित हैं और धार्मिक अल्पसंख्यकों को भेदभाव तथा हिंसा का सामना करना पड़ता है।
राष्ट्रवादी नजरिए से यह कहना कि जरदारी के बयान पाकिस्तान की सहिष्णुता या भारत की नैतिक श्रेष्ठता साबित करते हैं गलत है। केवल एक भाषण से ऐसा निष्कर्ष नहीं निकलता। समानता के नागरिक अधिकार के लिए सहिष्णुता एक कमजोर पैमाना है और यह दावा कि पाकिस्तानी हिंदू वहीं रहना पसंद करते हैं साक्ष्य की मांग करता है न कि केवल बयानबाजी की। असली परीक्षा यह है कि पहचान के दावों के बजाय पाकिस्तान की जनगणना की तुलना जबरन धर्म परिवर्तन और हिंसा के वास्तविक मामलों से की जाए।
स्रोत (2): indiatoday.in, hindustantimes.com
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