इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पेट्रोल पंप मालिक की प्रतिस्पर्धा संबंधी याचिका खारिज की

Petrol Pump Owner Has No Locus To Challenge Approval To Rival Outlet Merely Due To Business Competition: Allahabad High Court

The Allahabad High Court has dismissed a writ petition by an existing petrol pump owner seeking to challenge approval and a No Objection Certificate for a rival outlet near Bahraich. A Bench…

संक्षेप में खबर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बहराइच के पास एक प्रतिद्वंद्वी पेट्रोल पंप को मिली मंजूरी और अनापत्ति प्रमाण पत्र को चुनौती देने वाली एक मौजूदा पेट्रोल पंप मालिक की रिट याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि प्रतिस्पर्धा के कारण होने वाला वित्तीय नुकसान किसी कारोबारी को रिट याचिका दायर करने का अधिकार नहीं देता है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पेट्रोल पंप मालिक की प्रतिस्पर्धा संबंधी याचिका खारिज की

याचिकाकर्ता एम/एस डी.के. ऑटोमोबाइल्स ने तर्क दिया कि प्रस्तावित पेट्रोल पंप ईंधन स्टेशन की दूरी के नियमों का उल्लंघन करता है। अदालत ने गौर किया कि एक पिछली कार्यवाही में संशोधन के तहत यह अपवाद दर्ज था कि जहां आउटलेट कम से कम 7 मीटर चौड़ी साझा सर्विस रोड का उपयोग करते हैं। अदालत ने कहा कि अंतिम अनुमति आवश्यक सड़क के निर्माण पर निर्भर करेगी और इस नई याचिका को कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग करार दिया। अदालत ने इस दावे को भी खारिज कर दिया कि उसे मौजूदा व्यवसाय को प्रतिस्पर्धा से बचाना चाहिए।

द इंडियन ओपिनियन

इस फैसले का बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया संस्करण यह है कि यह ईंधन कंपनियों को सुरक्षा या पहुंच के नियमों को नजरअंदाज करने की छूट देता है। ऐसा नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अंतिम अनुमति मिलने से पहले 7 मीटर की सर्विस रोड का निर्माण अनिवार्य है। इसके विपरीत यह दावा कि कोई भी नजदीकी आउटलेट अपने आप अवैध है, उतना ही कमजोर है। व्यावहारिक परीक्षण यह है कि क्या अधिकारी संचालन शुरू होने से पहले निर्धारित पहुंच की शर्त को लागू करते हैं, न कि यह कि क्या कोई मौजूदा कारोबारी कमाई कम होने के डर से याचिका दायर कर रहा है।


स्रोत: livelaw.in

यह खबर ऊपर लिंक किए गए स्रोत से एआई द्वारा तैयार की गई है।

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