
A study of 200 adults has linked certain gut bacteria with stronger psychopathic traits, though it did not establish that microbes cause behaviour. Researchers led by University of Porto scientist Carolina Costa…
दो सौ वयस्कों पर किए गए एक अध्ययन में आंत के कुछ बैक्टीरिया और मनोरोग के मजबूत लक्षणों के बीच संबंध पाया गया है, हालांकि यह साबित नहीं हुआ कि रोगाणु ही व्यवहार का कारण हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ पोर्टो की वैज्ञानिक कैरोलिना कोस्टा के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने प्रश्नावली और प्रतिभागियों के रक्त, लार व मल के नमूनों का विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि अधिक मजबूत मनोरोग लक्षण वाले प्रतिभागियों में एलिसोनेला, प्रीवोटेला और सी. एवरिएन्सिस का स्तर अधिक था, जबकि टी. विन्सेन्टी का संबंध इसके विपरीत पाया गया। समूहों के बीच मल में ग्लूकोज और टॉरिन के स्तर में भी अंतर देखा गया।
ट्रांसलेशनल साइकियाट्री में बिना संपादित और बिना पीयर-रिव्यू के प्रकाशित इस अध्ययन में उन उप-नैदानिक लक्षणों की जांच की गई जो व्यापक आबादी में अलग-अलग स्तरों पर पाए जाते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि ये निष्कर्ष सहसंबंधी हैं और अपेक्षाकृत छोटे व स्वयं रिपोर्ट किए गए आंकड़ों पर आधारित हैं। हो सकता है कि आहार, हार्मोन या व्यवहार ने माइक्रोबायोम को आकार दिया हो, न कि इसके विपरीत। मनोरोग लक्षणों का मतलब स्वतः हिंसा या अपराध नहीं होता है।
आलस भरी हेडलाइन यह हो सकती है कि आंत के बैक्टीरिया मनोरोगी बनाते हैं। इसके विपरीत व्यापक तर्क यह हो सकता है कि इस अध्ययन का कोई अर्थ नहीं है। न तो यह सही है और न ही वह। यह 200 लोगों पर आधारित एक प्रारंभिक अध्ययन है जिसमें स्वयं रिपोर्ट किए गए आंकड़े शामिल हैं और कारण व प्रभाव का कोई प्रमाण नहीं है। आहार और हार्मोनल अंतर इन सूक्ष्मजैविक पैटर्न को समझा सकते हैं। सबसे उपयोगी परीक्षण बड़े और विविध समूहों तथा नियंत्रित आहार के साथ दोहराव होगा, जिसके बाद ऐसा शोध किया जाना चाहिए जो यह बता सके कि क्या रोगाणुओं को बदलने से मनोरोग लक्षणों के स्कोर में बदलाव आता है।
स्रोत: timesofindia.indiatimes.com
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