
Five Army personnel are missing and four people have died after a flash flood and a landslide hit Arunachal Pradesh on Friday evening, officials said. In Dibang Valley district, two shelters of…
अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी में फ्लैश फ्लड के बाद एक सैन्यकर्मी लापता हो गया है। खराब मौसम के बावजूद नजदीकी सैन्य चौकियों की कई टीमें तलाश और बचाव अभियान में जुटी हैं। एक अन्य घटना में ऊपरी सुबनसिरी जिले के केओजारिंग-बयाचिंग सड़क निर्माण स्थल पर 14 अगस्त को भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में कई मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका है।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी के अनुसार अब तक एक शव बरामद किया गया है जिसकी पहचान रोन्या मारबोम के रूप में हुई है। मलबे में दबे अन्य लोगों को खोजने के लिए बचाव कार्य जारी है और प्रशासन ने सभी उपलब्ध संसाधनों को काम पर लगा दिया है। स्थिति विकसित होने के साथ ही हताहतों के बारे में अधिक जानकारी की प्रतीक्षा है।
अरुणाचल प्रदेश में हुई दोहरी आपदा ने एक बार फिर हिमालय की नाजुक ढलानों पर अनियंत्रित बुनियादी ढांचे के नुकसान को उजागर किया है। बचाव कार्य में देरी को लेकर राज्य और केंद्र की एजेंसियों के बीच होने वाला आरोप प्रत्यारोप का खेल मूल मुद्दे को नजरअंदाज करता है। सवाल यह है कि मानसून के दौरान भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में सड़क खुदाई और निर्माण की अनुमति क्यों दी जाती है। ऐसी परियोजनाओं का स्पष्ट ऑडिट और मौसमी प्रतिबंध अनिवार्य है। आने वाले समय में हताहतों की संख्या यह तय करेगी कि राज्य की आपदा तैयारी पर्याप्त है या केवल कागजी कवायद।
स्रोत: timesnownews.com
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