
Satkar Caterers withdrew from the canteen at the Hindu Hruday Samrat Balasaheb Thackeray Trauma Care Hospital in Jogeshwari East on August 3, citing inability to complete statutory licence requirements including FSSAI, health…
सत्कार कैटरर्स ने 3 अगस्त को जोगेश्वरी पूर्व स्थित हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे ट्रॉमा केयर अस्पताल की कैंटीन से अपना संचालन बंद कर दिया। उन्होंने इसके पीछे एफएसएसएआई, स्वास्थ्य और अग्निशमन विभाग से जुड़ी अनिवार्य कानूनी अनुमति न मिल पाने का हवाला दिया। द फ्री प्रेस जर्नल के अनुसार कैटरर ने अस्पताल को सूचित किया कि वे तत्काल प्रभाव से अपना काम बंद कर रहे हैं।
सत्कार कैटरर्स के एक प्रतिनिधि का कहना है कि मुख्य समस्या बीएमसी के साथ वैध अनुबंध का अभाव था, जिसके बिना वे जरूरी लाइसेंस नहीं ले पा रहे थे। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. निरंजन क्षीरसागर ने इस दावे को नकारा है। उनका कहना है कि कैटरर से लाइसेंस मांगे गए थे लेकिन वे टालमटोल कर रहे थे और अंततः उन्होंने खुद ही काम छोड़ दिया। एक नागरिक अधिकारी ने आरोप लगाया कि कैटरर ने अस्पताल के किसी पूर्व अधिकारी की मिलीभगत से बिना किसी आधिकारिक अनुमति के जगह पर कब्जा कर रखा था, जिससे बीएमसी को चार से पांच वर्षों तक राजस्व का नुकसान हुआ।
कैटरर और अस्पताल प्रशासन दोनों ही एक-दूसरे पर आरोप मढ़ रहे हैं, लेकिन असल मुद्दा यह है कि इतने वर्षों तक बिना उचित अनुमति के कैंटीन कैसे चलती रही। बीएमसी और अस्पताल को इस चूक के लिए मरीजों को जवाब देना चाहिए। स्वास्थ्य कार्यकर्ता चेतन कोठारी ने सही तौर पर मामले की जांच की मांग उठाई है। अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चार से पांच वर्षों में बीएमसी को कुल कितना राजस्व नुकसान हुआ है, क्योंकि यह आंकड़ा ही इस लापरवाही की असली गंभीरता को उजागर करेगा।
स्रोत: freepressjournal.in
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