
Tesco’s India global capability centre has evolved from a basic dashboard into an AI cockpit that now drives decisions across its nearly 5,000 stores worldwide, The Hindu reports. The Bengaluru hub, set…
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार टेस्को का इंडिया ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर अब एक साधारण डैशबोर्ड से विकसित होकर एआई कॉकपिट बन गया है जो दुनिया भर में उसके करीब 5,000 स्टोर के फैसलों को संचालित करता है। बेंगलुरु में स्थित यह हब 2004 में पेरोल और ग्राहक संपर्क कार्यों के लिए शुरू किया गया था। आज यह टेस्को का दुनिया भर में सबसे बड़ा सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और एनालिटिक्स केंद्र बन चुका है जहाँ करीब 4,000 से 5,000 कर्मचारी काम करते हैं। पिछले साल इस केंद्र के एआई एल्गोरिदम ने क्लबकार्ड प्रोग्राम के जरिए करीब 1.4 से 1.5 करोड़ ग्राहकों को 67 करोड़ व्यक्तिगत ऑफर देने में मदद की। एनालिटिक्स और एआई के ग्रुप डायरेक्टर वेंकट राघवन ने बताया कि अब ध्यान लागत से हटकर वैल्यू पर केंद्रित है और भारत अब उच्च स्तरीय विशिष्ट क्षमताएं विकसित कर रहा है।
टेस्को के बेंगलुरु केंद्र का एआई कॉकपिट बनने की खबर इस बात को पुष्ट करती है कि भारत के जीसीसी ने अब खुद को बैक ऑफिस की छवि से बाहर निकाल लिया है। यह कुछ चुनिंदा केंद्रों के लिए तो सच है लेकिन ज्यादातर केंद्र अभी भी केवल नियमित कार्यों तक ही सीमित हैं। असली परीक्षा यह है कि क्या यह उच्च स्तरीय क्षमता केवल एक ब्रिटिश रिटेलर के मुनाफे के लिए है या इससे भारतीय उपभोक्ताओं को भी कोई लाभ मिलता है। आखिर कब कोई घरेलू किराना स्टोर ‘सेगमेंट ऑफ वन’ निजीकरण की पेशकश करेगा। यही आंकड़ा इस सवाल का जवाब देगा।
स्रोत: thehindu.com
यह खबर ऊपर दिए गए स्रोत से एआई द्वारा तैयार की गई है।